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टी20 विश्व कप 2007 से पहले खिलाड़ियों ने खेलने से किया था इनकार: ललित मोदी

नई दिल्ली, 04 जून (वेब वार्ता)। पूर्व आईपीएल अध्यक्ष और क्रिकेट प्रशासक ललित मोदी ने टी20 विश्व कप 2007 को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले भारतीय टीम के कई वरिष्ठ खिलाड़ियों ने टी20 प्रारूप को गंभीरता से नहीं लिया था और इसमें खेलने की इच्छा भी नहीं जताई थी। उस समय खिलाड़ियों को यह प्रारूप भविष्य का क्रिकेट नहीं लगता था, लेकिन बाद में यही प्रारूप दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय बन गया।

एक साक्षात्कार में ललित मोदी ने बताया कि वर्ष 2007 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वह भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में गए थे और खिलाड़ियों से आगामी टी20 विश्व कप में हिस्सा लेने की अपील की थी। हालांकि अधिकांश वरिष्ठ खिलाड़ियों ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया।

ललित मोदी के अनुसार खिलाड़ियों का मानना था कि इंग्लैंड दौरा काफी लंबा और थकाऊ रहा है तथा वे टूर्नामेंट में भाग लेने के बजाय अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उस समय कई खिलाड़ियों को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि टी20 क्रिकेट का भविष्य क्या होगा।

उन्होंने बताया, “जब मैं खिलाड़ियों से मिला और टी20 खेलने की बात की तो अधिकांश ने कहा कि यह कैसा क्रिकेट है और वे इसे नहीं खेलना चाहते। उनका ध्यान लंबे दौरे के बाद आराम करने पर था।”

युवा टीम पर लगाया गया दांव

टी20 विश्व कप 2007 से पहले भारतीय टीम इंग्लैंड के लंबे दौरे पर थी, जहां उसे टेस्ट और एकदिवसीय श्रृंखलाएं खेलनी थीं। इसी दौरे के तुरंत बाद दक्षिण अफ्रीका में टी20 विश्व कप आयोजित होना था।

उस समय भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने एक अलग रणनीति अपनाते हुए युवा खिलाड़ियों को मौका देने का फैसला किया। महेंद्र सिंह धोनी को टीम की कप्तानी सौंपी गई और उनके नेतृत्व में एक नई टीम तैयार की गई। इस टीम में वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, दिनेश कार्तिक, आरपी सिंह और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी शामिल थे।

वहीं सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे अनुभवी खिलाड़ी इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बने थे।

आज ऐसा फैसला स्वीकार करना मुश्किल

ललित मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में यदि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए मुख्य खिलाड़ियों को बाहर रखकर दूसरी टीम भेजी जाए तो भारी विवाद खड़ा हो सकता है। उनके अनुसार आज क्रिकेट प्रेमी, खिलाड़ी और प्रशासक सभी चाहते हैं कि किसी भी विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में देश की सर्वश्रेष्ठ टीम ही हिस्सा ले।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में किसी विश्व कप में वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनुपस्थिति को स्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा। ऐसे फैसले पर व्यापक बहस और आलोचना देखने को मिल सकती है।

इतिहास बदलने वाला साबित हुआ टूर्नामेंट

हालांकि उस समय टी20 क्रिकेट को लेकर उत्साह सीमित था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में आयोजित टी20 विश्व कप 2007 भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। महेंद्र सिंह धोनी की युवा टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया और इसके बाद टी20 क्रिकेट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती चली गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसी सफलता ने आगे चलकर दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 लीगों में से एक इंडियन प्रीमियर लीग के लिए भी मजबूत आधार तैयार किया। आज स्थिति यह है कि टी20 क्रिकेट का प्रभाव टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों के बीच यह प्रारूप सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है।

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