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2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली, 16 सितंबर (वेब वार्ता)। 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अंजन दत्ता नामक याचिकाकर्ता ने इस संबंध में जनहित याचिका दाखिल कर व्यवस्था को संविधान में निहित समानता के अधिकार और व्यापार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है।

बिना उचित चर्चा के निर्णय लेने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की व्यवस्था उचित चर्चा के बिना लागू की जा रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस निर्णय को लागू करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया।

याचिका में यह भी कहा गया है कि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इसके चलते ग्राहक और व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। इससे देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

15 अक्टूबर से शुल्क लागू करने की घोषणा

केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने की घोषणा की है। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत लेनदेन और छोटी रकम के भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।

सरकार के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। वहीं, 2,000 रुपये तक के ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले भुगतान पर भी एमडीआर लागू नहीं होगा।

यूपीआई शुल्क को लेकर राजनीतिक विवाद

यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के निर्णय के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की है।

यूपीआई भुगतान शुल्क से जुड़ी प्रमुख बातें

  • 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।

  • 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।

  • 3,000 रुपये के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से 12 रुपये शुल्क निर्धारित होगा।

  • प्राप्त शुल्क को बैंकों सहित भुगतान तंत्र से जुड़े विभिन्न साझेदारों के बीच साझा किया जाएगा।

  • व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

  • 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।

  • दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों में प्रति लेनदेन पांच रुपये का एकमुश्त एमडीआर लागू होगा।

  • म्यूचुअल फंड और शेयर कारोबार से जुड़े दलालों को किए जाने वाले भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा के साथ 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा।

  • प्रतिमाह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा होगी।

  • यूपीआई ऐप प्रदाताओं को मंच शुल्क या किसी भी प्रकार का छिपा हुआ शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

  • बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी यूपीआई भुगतान का शुल्क उपभोक्ताओं से न वसूलें।

  • व्यक्तियों के लिए मुफ्त यूपीआई लेनदेन पर कोई मासिक कोटा या संख्या सीमा लागू नहीं होगी।

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