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TMC Crisis 2026: बाग़ी विधायकों ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाया, अब पार्टी और चुनाव चिन्ह बचाने की चुनौती

कोलकाता/नई दिल्ली, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता

TMC Crisis 2026 में पश्चिम बंगाल की राजनीति ने नया और नाटकीय मोड़ ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बाग़ी विधायकों ने कोलकाता में आयोजित बैठक में पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा करते हुए पूर्व मंत्री अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर सियासी संकट को गहरा कर दिया है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भविष्य, संगठन, सांसदों-विधायकों की वैधता और चुनाव चिन्ह को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने बैठक के बाद कहा कि सभी प्रक्रियाएं चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप पूरी की गई हैं और जल्द ही इसकी औपचारिक जानकारी चुनाव आयोग को भी दी जाएगी। हालांकि ममता बनर्जी समर्थक गुट ने इस पूरे घटनाक्रम को गैरकानूनी और हास्यास्पद बताते हुए अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • बाग़ी विधायकों ने ममता बनर्जी को टीएमसी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया
  • पूर्व मंत्री अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित किया गया
  • टीएमसी के 20 सांसद पहले ही अलग होकर एनडीए को समर्थन दे चुके हैं
  • ममता गुट ने हाईकोर्ट और अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा लेने की तैयारी की
  • पार्टी के चुनाव चिन्ह और संगठन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं

TMC Crisis 2026 में क्या हुआ?

सोमवार को कोलकाता में आयोजित बाग़ी गुट की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों की घोषणा की गई। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पूर्व मंत्री अरूप रॉय को सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुना गया है।

इसके अलावा ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और जावेद खान को महासचिव घोषित किया गया। वहीं फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और रथिन घोष को उपाध्यक्ष तथा अखरुज्जमान को कोषाध्यक्ष बनाया गया। बाग़ी गुट का दावा है कि वही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है।

क्या है पूरा मामला?2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बगावत शुरू हुई। पहले विधायकों का एक बड़ा समूह ममता बनर्जी से अलग हुआ, फिर 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया। अब बाग़ी विधायकों ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने और नया नेतृत्व घोषित करने का दावा किया है।

कितनी बड़ी है बगावत?

बाग़ी गुट का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उसके साथ 65 विधायक हैं। विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं, जबकि ममता बनर्जी के समर्थन में केवल 14 विधायक खुलकर सामने आए हैं। एक विधायक वर्तमान में जेल में हैं।

लोकसभा में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग होकर एक नए राजनीतिक गठजोड़ के साथ चले गए हैं और उन्होंने केंद्र में भाजपा नीत एनडीए सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।

ममता बनर्जी के पास क्या हैं कानूनी विकल्प?

ममता बनर्जी और उनके समर्थकों ने इस पूरे घटनाक्रम को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस का संविधान अध्यक्ष-केंद्रित है और अध्यक्ष के पास संगठन से जुड़े सभी मामलों में अंतिम अधिकार है।

ममता गुट का तर्क है कि केवल विधायक दल का बहुमत किसी राजनीतिक दल के संगठनात्मक नियंत्रण का निर्धारण नहीं कर सकता। पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यसमिति, राज्य समितियां और संगठनात्मक ढांचे की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

अभिषेक बनर्जी ने सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की

Abhishek Banerjee

ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग हुए 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी दल का वैध विलय तभी माना जाएगा जब मूल संगठन के दो-तिहाई सदस्य उसके पक्ष में हों। केवल सांसदों या विधायकों के आधार पर पार्टी का पूर्ण विलय नहीं माना जा सकता।

क्या टीएमसी का चुनाव चिन्ह भी जा सकता है? TMC Symbol1

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के चुनाव चिन्ह को बचाने की है। अतीत में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मामलों में चुनाव आयोग ने बहुमत वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह सौंपा था।

यदि चुनाव आयोग इस मामले में भी विधायकों और सांसदों के बहुमत को आधार मानता है, तो तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिन्ह बाग़ी गुट को मिलने की संभावना बन सकती है। ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी को नई पहचान और नए चुनाव चिन्ह के साथ राजनीति करनी पड़ सकती है।

मुद्दास्थिति
पार्टी अध्यक्षबाग़ी गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित किया
विधायक समर्थनबाग़ी गुट का दावा- 65 विधायक साथ
सांसद20 सांसद अलग होकर एनडीए समर्थक गुट में
चुनाव चिन्हमामला चुनाव आयोग में जा सकता है
अदालती स्थितिहाईकोर्ट में विभिन्न याचिकाएं लंबित

टीएमसी के बैंक खाते भी विवाद में

रिपोर्टों के अनुसार पार्टी के कुछ बैंक खातों पर अस्थायी रोक भी लगाई गई है। बताया गया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर जारी विवाद के कारण बैंकिंग लेनदेन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

यदि संगठनात्मक विवाद लंबा खिंचता है तो पार्टी के वित्तीय संचालन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

अब आगे क्या होगा?अगला बड़ा फैसला अदालत और चुनाव आयोग के स्तर पर होगा। यह तय किया जाएगा कि असली तृणमूल कांग्रेस किस गुट को माना जाए। साथ ही सांसदों की सदस्यता, विधायक दल की वैधता और चुनाव चिन्ह पर भी निर्णय लिए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोलकाता नगर निगम चुनाव इस संघर्ष की पहली बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के तीन दशक लंबे राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत, चुनाव आयोग और संगठनात्मक शक्ति का संतुलन ही तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस की कमान आखिर किसके हाथ में रहेगी।

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