नई दिल्ली, 22 जून (वेब वार्ता)। पिछले दो वर्षों से भारत-कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक तनाव अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के संबंधों में नई गर्माहट देखने को मिल रही है और द्विपक्षीय सहयोग के एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी है।
कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर ने कहा है कि भारत और कनाडा के बीच सहयोग का नया युग शुरू हो चुका है। उनके अनुसार, दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच नियमित संवाद हो रहा है और दोनों नेता व्यावहारिक परिणामों पर जोर देते हैं। हाल में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हुई थी।
2026 तक मुक्त व्यापार समझौते का लक्ष्य
आर्थिक मोर्चे पर भारत और कनाडा व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते को वर्ष 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ कनाडा गए थे। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। व्यापारिक समुदाय भी संभावित समझौते को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है।
निवेश और व्यापार में बढ़ेगा सहयोग
कनाडा भारत में बड़े निवेशकों में शामिल है। भारत में कनाडा का निवेश लगभग 109 अरब अमेरिकी डॉलर बताया जाता है। वहीं, कनाडा में भारत का निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। प्रस्तावित समझौते के बाद व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर रहेगा विशेष जोर
कनाडा को स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति माना जाता है। भारत की औद्योगिक और ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी मानी जा रही है।
भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार की योजना पर कार्य कर रहा है, जिसके लिए यूरेनियम की आवश्यकता होगी। कनाडा विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है और इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं।
इसके अलावा, दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में भी कनाडा की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भारत और कनाडा के बीच सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
सुरक्षा और कूटनीति में भी बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा देने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों ने संवाद और समन्वय की एक मजबूत व्यवस्था विकसित की है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की गलतफहमी की संभावना कम होगी।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस वर्ष कनाडा आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया है। प्रस्तावित यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में नई मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और कनाडा के बीच बढ़ती निकटता न केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की साझेदारी को भी और मजबूत करेगी।




