नई दिल्ली, 20 मई (वेब वार्ता)। देशभर में गर्मी का प्रकोप केवल दिन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब रातों का बढ़ता तापमान भी गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप लेने लगा है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कई शहरों में रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया, जिसने लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों पर असर डाला है। विशेषज्ञ इसे एक खामोश लेकिन खतरनाक संकट के रूप में देख रहे हैं।
मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार देश के अनेक शहरों में रात का तापमान सामान्य स्तर से ऊपर बना हुआ है। दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में रात का पारा लगातार ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया है। वैज्ञानिक इस स्थिति को ‘गर्म रातें’ या ‘हॉट नाइट्स’ की श्रेणी में रखते हैं, जब रात का तापमान शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का अवसर नहीं देता। यह स्थिति अब केवल मई-जून तक सीमित नहीं रही, बल्कि अप्रैल से ही दिखाई देने लगी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर दिनभर की गर्मी के बाद रात में स्वयं को सामान्य तापमान पर लाने की प्राकृतिक प्रक्रिया अपनाता है। लेकिन जब रात का तापमान लगातार 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है, तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। इससे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।
गर्म रातों का असर केवल बेचैनी या नींद की कमी तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि लगातार गर्म रातें हृदय रोग, पक्षाघात, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को गंभीर बना सकती हैं। खराब और अधूरी नींद के कारण मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहरों में यह समस्या और अधिक गंभीर है। इसके पीछे ‘शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव’ को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंक्रीट, सड़कें और ऊंची इमारतें दिनभर गर्मी सोखकर रात में उसे छोड़ती हैं, जिससे शहर तवे की तरह तपते रहते हैं। हरियाली की कमी और जलाशयों का घटता दायरा इस स्थिति को और विकराल बना देता है।
गर्मी से राहत देने वाले साधन भी कई स्थानों पर कम प्रभावी साबित हो रहे हैं। अध्ययनों में सामने आया है कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के घरों के भीतर रात का तापमान कई बार 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है। ऐसे में पंखे और कूलर भी अपेक्षित राहत नहीं दे पाते, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शरीर अगले दिन की गर्मी झेलने के लिए तैयार नहीं हो पाता।
जलवायु विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दशकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। आकलनों के अनुसार इस सदी के अंत तक भारत में सबसे ठंडी रातों का तापमान भी कई डिग्री तक बढ़ सकता है। इसका अर्थ है कि भविष्य में रातें दिनों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो सकती हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीना, घरों में वायु संचार बनाए रखना, हल्के सूती वस्त्र पहनना और बुजुर्गों, बच्चों तथा बीमार लोगों की विशेष देखभाल आवश्यक बताई गई है। साथ ही शहरी नियोजन में हरियाली बढ़ाने, जलाशयों को पुनर्जीवित करने और रात के तापमान को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने की जरूरत पर भी बल दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्म रातें अब केवल मौसमी असुविधा नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट हैं। यदि समय रहते इसके प्रति जागरूकता और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप से सामने आ सकता है।




