नई दिल्ली, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता
केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। George Kurian Resignation से जुड़े इस घटनाक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा था और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया था।
राजनीतिक हलकों में पिछले कुछ दिनों से उनके मंत्री पद छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। जॉर्ज कुरियन जून 2024 में मोदी सरकार 3.0 के गठन के दौरान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल हुए थे।
- जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दिया
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस्तीफा स्वीकार किया
- राज्यसभा कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा था
- बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया था
George Kurian Resignation के पीछे क्या हैं कारण?
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें उनका नाम शामिल नहीं था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि वह जल्द ही मंत्री पद छोड़ सकते हैं।
हालांकि उनके इस्तीफे को लेकर सरकार या भाजपा की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और संगठनात्मक पुनर्संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं।
जून 2024 में बने थे मोदी सरकार 3.0 का हिस्सा
जॉर्ज कुरियन को जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी सरकार में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। उन्हें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं और मंत्रालयों से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी देखने को मिली।
संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत स्वीकार हुआ इस्तीफा
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। भारतीय संविधान के इस प्रावधान के अनुसार केंद्रीय मंत्री राष्ट्रपति के समक्ष अपना इस्तीफा प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब संबंधित मंत्रालयों में उनकी जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक संकेतों पर टिकी नजर
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा की भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं का भी संकेत हो सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देती है या नहीं तथा केंद्र सरकार में उनके स्थान पर किसे जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
फिलहाल राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया है। राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर चर्चा तेज है कि भाजपा और केंद्र सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
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