रायपुर/नई दिल्ली, राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
देश में मानसून की कमजोर स्थिति और El Nino Monsoon Impact की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार अल नीनो के कारण मानसून पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए अग्रिम रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि देश में अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है और जुलाई महीने में भी मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है।
नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों के लिए वैकल्पिक फसल योजनाएं, सिंचाई प्रबंधन, बीमा सुरक्षा और कृषि सलाह सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।
- देश में अब तक लगभग 43% कम वर्षा दर्ज की गई
- जुलाई में भी मानसून कमजोर रहने की आशंका
- 315 जिले कम वर्षा से प्रभावित हो सकते हैं
- 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया
- किसानों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती की सलाह
El Nino Monsoon Impact को लेकर सरकार क्यों चिंतित?
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मौसम संबंधी आकलनों के अनुसार देश के लगभग 315 जिले सामान्य से कम वर्षा की स्थिति का सामना कर सकते हैं। इनमें से 111 जिले ऐसे हैं जिन्हें उच्च प्राथमिकता वाले जिलों की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि वहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं और खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर करती है।
सरकार का मानना है कि यदि जुलाई और अगस्त के दौरान भी वर्षा सामान्य से कम रहती है तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए राज्यों को पहले से तैयारी करने और किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
दलहन, तिलहन और मोटे अनाज पर दिया जा रहा जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यों को ऐसी फसलों को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है। इनमें दलहन, तिलहन और मोटे अनाज प्रमुख हैं। ये फसलें कम वर्षा की स्थिति में भी अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं।
सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है जो जल संकट की स्थिति में भी आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो सकें। इससे किसानों की आय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों तक पहुंचाई जा रही मौसम और खेती संबंधी सलाह
श्री चौहान ने बताया कि किसानों को समय पर कृषि सलाह उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सक्रिय किया गया है।
इसके अलावा किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन, बुवाई और सिंचाई संबंधी सलाह समय पर मिल सके।
फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड पर विशेष फोकस
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार फसल बीमा योजनाओं के व्यापक कवरेज पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि कम वर्षा या मौसम संबंधी अन्य चुनौतियों के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई किसानों को मिल सके।
इसके साथ ही किसानों को शीघ्रता से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वित्तीय सहायता आसानी से मिल सके।
पशुधन और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी
कम वर्षा का असर केवल फसलों पर ही नहीं बल्कि पशुपालन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। इसे देखते हुए सरकार ने पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते चारे की व्यवस्था कर ली जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
| मुख्य तथ्य | विवरण |
|---|---|
| कम वर्षा | लगभग 43% |
| संभावित प्रभावित जिले | 315 |
| उच्च प्राथमिकता वाले जिले | 111 |
| प्रमुख वैकल्पिक फसलें | दलहन, तिलहन, मोटे अनाज |
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया कि सरकार की अग्रिम तैयारियों, फसल विविधीकरण, बीमा कवरेज और किसानों तक समय पर पहुंचाई जा रही सलाह के माध्यम से कम वर्षा के संभावित दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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