नई दिल्ली, 03 जून (वेब वार्ता)। राज्यसभा की 27 सीटों के लिए होने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को प्रस्तावित चुनाव के मद्देनजर पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में जुटा है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित होने के कारण विभिन्न राज्यों में दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ नेताओं की महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने की है। कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में कई प्रमुख नेता राज्यसभा टिकट के लिए प्रयासरत हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर सर्वसम्मति बनाने का दबाव बढ़ गया है।
कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का पुनः राज्यसभा भेजा जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की संभावित उम्मीदवारी को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। राज्य की राजनीति में दोनों नेताओं की भूमिका को देखते हुए पार्टी नेतृत्व बेहद सावधानी से निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।
मध्य प्रदेश में एकमात्र राज्यसभा सीट को लेकर राजनीतिक हलचल सबसे अधिक दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सहित कई अन्य नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दावेदारों की बढ़ती संख्या और गुटीय समीकरणों को देखते हुए नेतृत्व किसी भी प्रकार की असंतुष्टि और संभावित क्रॉस-वोटिंग से बचने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।
राजस्थान और झारखंड में भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। दोनों राज्यों में कई वरिष्ठ नेता राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर विचार कर रहा है।
दक्षिण भारत में भी पार्टी अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी हुई है। तमिलनाडु में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर राज्यसभा में अपनी उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि सहयोगी दलों के साथ समन्वय के जरिए विपक्षी एकता को और मजबूती दी जाए।
वर्तमान में राज्यसभा में कांग्रेस के 29 सदस्य हैं। पार्टी नेतृत्व न केवल अपनी मौजूदा संख्या बनाए रखना चाहता है, बल्कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर सदन में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की रणनीति भी तैयार कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी राज्यसभा चुनाव केवल सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबला भी साबित हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे राजनीतिक जगत की नजरें टिकी हुई हैं।




