नई दिल्ली, 16 जुलाई (वेब वार्ता)। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार के संभावित विधायी एजेंडे को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने घोषणा की है कि यदि सरकार परिसीमन विधेयक, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम संशोधन विधेयक और अन्य प्रमुख विधेयकों को सदन में पेश करती है तो उनका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस संबंध में कांग्रेस संसदीय रणनीति समिति की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह जानकारी दी।
कांग्रेस की यह महत्वपूर्ण बैठक पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित हुई, जिसमें संसद के मानसून सत्र की रणनीति और विभिन्न प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के उन सभी विधेयकों का विरोध करेगी, जिन्हें पार्टी संविधान, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत मानती है। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकजुटता को मजबूत बनाए रखने का भी प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक को एक बार फिर संसद में लाने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार, इससे पहले इस विधेयक को आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका था और अब सरकार दोबारा इसे आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध करती रही है और भविष्य में भी अपना विरोध जारी रखेगी।
बैठक में न्यायाधीशों को हटाने से संबंधित प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर भी चर्चा हुई। श्री रमेश ने कहा कि इस विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति का विपक्ष ने बहिष्कार किया है और कांग्रेस इस प्रस्ताव का भी विरोध करेगी।
कांग्रेस ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव के प्रति भी अपना विरोध दोहराया। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति को दस अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन कांग्रेस इस अवधारणा से सहमत नहीं है और संसद में इसका विरोध करेगी।
इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने संकेत दिया कि यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ को मानसून सत्र में प्रस्तुत करती है तो उसका भी विरोध किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक है।
श्री रमेश ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में संशोधन संबंधी विधेयक दोबारा लाए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध कर चुकी है, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। यदि इसे पुनः प्रस्तुत किया गया तो पार्टी फिर से इसका विरोध करेगी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में संभावित संशोधनों को लेकर भी कांग्रेस ने चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि यही अधिनियम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का आधार है और यदि इसमें किसी प्रकार का बदलाव किया जाता है तो कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करेगी।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि सरकार के मौजूदा विधायी एजेंडे में उसे ऐसा कोई प्रमुख विधेयक दिखाई नहीं देता, जिसका समर्थन किया जा सके। पार्टी ने कहा कि वह संसद के भीतर और बाहर जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर अपनी आवाज मजबूती से उठाएगी और विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तय करेगी।




