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प्रियंका गांधी के निजी सचिव बनकर ठगी का प्रयास, मंत्री बनाने के नाम पर मांगे तीन करोड़ रुपये

तिरुवनंतपुरम, 16 जुलाई (वेब वार्ता)। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव बनकर सांसदों और विधायक से करोड़ों रुपये की मांग करने के आरोप में केरल में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी ने स्वयं को प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव के रूप में प्रस्तुत करते हुए जनप्रतिनिधियों को मंत्री पद दिलाने का झांसा दिया और उनसे धनराशि मांगने का प्रयास किया। मामले की जांच साइबर पुलिस कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी. एस. राजकुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत राज्य पुलिस प्रमुख और वायनाड के पुलिस अधीक्षक को भेजी गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने नई दिल्ली निवासी डी. एस. राजकुमार की पहचान का दुरुपयोग करते हुए कई सांसदों और विधायकों से संपर्क किया।

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कांग्रेस विधायक के. विद्या बालकृष्णन, सांसद शफी परंबिल और सांसद डीन कुरियाकोस से संपर्क किया। उसने स्वयं को प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय का अधिकारी बताते हुए जनप्रतिनिधियों से धन की मांग की और राजनीतिक लाभ दिलाने का प्रलोभन दिया।

पुलिस के अनुसार, छह जुलाई को दोपहर लगभग दो बजे विधायक के. विद्या बालकृष्णन को एक संदेश सेवा के माध्यम से कॉल प्राप्त हुई। कॉल करने वाले ने स्वयं को नई दिल्ली स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से डी. एस. राजकुमार बताते हुए कहा कि केरल मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल होने वाला है। उसने दावा किया कि यदि तीन करोड़ रुपये दिए जाएं तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है।

करीब दस मिनट तक चली बातचीत के दौरान आरोपी ने यह भी कहा कि कोझिकोड के एक सांसद ने मंत्री पद के लिए विधायक के नाम की सिफारिश की है। हालांकि बातचीत के दौरान ही विधायक को कॉल करने वाले की बातों पर संदेह हो गया।

संदेह होने पर विधायक ने संबंधित सांसद से संपर्क किया। सांसद ने बताया कि स्वयं को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के कार्यालय का प्रतिनिधि बताने वाले एक व्यक्ति ने उनसे उनका और एक अन्य विधायक का संपर्क विवरण मांगा था। इसके बाद विधायक ने सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से संपर्क किया, जहां स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार का कोई कॉल नहीं किया गया था और यह पूरी तरह ठगी का प्रयास था।

इस मामले में वायनाड साइबर पुलिस ने फर्जी पहचान अपनाने, धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे पहले कोझिकोड साइबर पुलिस ने भी विधायक के. विद्या बालकृष्णन की शिकायत पर इसी मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि कॉल नई दिल्ली से की गई थी। इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान भी कर ली गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संबंधित सिम कार्ड वास्तविक दस्तावेजों पर जारी किया गया था या फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष दल शीघ्र ही नई दिल्ली जाएगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस धोखाधड़ी में कोई संगठित गिरोह शामिल है या आरोपी ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम देने की कोशिश की।

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