नई दिल्ली, 04 अगस्त (वेब वार्ता)। नीट परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत के छात्र आंदोलनों की तुलना बांग्लादेश या नेपाल के आंदोलनों से करना अनुचित है। उनके अनुसार भारत के पास महात्मा गांधी की अहिंसक संघर्ष की ऐसी विरासत है, जिससे पूरी दुनिया प्रेरणा लेती है।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास पर समाचार एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में अभिजीत दीपके ने कहा कि दिल्ली में छात्रों का हालिया आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की तुलना बांग्लादेश और नेपाल से कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने किसी प्रकार की हिंसा का सहारा नहीं लिया। उनका कहना था कि छात्रों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन संयम बनाए रखा और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि भारत को प्रेरणा के लिए किसी दूसरे देश की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यहां महात्मा गांधी की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है।
शिक्षा को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की मांग
अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रत्येक चुनाव में शिक्षा सबसे प्रमुख मुद्दा होना चाहिए। उनके अनुसार यदि शिक्षा राजनीतिक विमर्श का केंद्र नहीं बनती है तो इसका अर्थ है कि देश अपने भविष्य की उपेक्षा कर रहा है। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण निवेश बताते हुए सरकार से इस क्षेत्र में अधिक संसाधन लगाने की मांग की।
नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे की मांग
उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े कथित घटनाक्रम में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने में हो रही देरी पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित परिवारों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो संगठन आगे भी आंदोलन करेगा।
भाजपा पर भी साधा निशाना
अभिजीत दीपके ने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में मर्यादा और शालीनता न छोड़ें। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार लाना है, इसलिए आंदोलन हमेशा अनुशासित और लोकतांत्रिक होना चाहिए।
झारखंड के छात्रों को समर्थन
उन्होंने झारखंड में लोक सेवा आयोग और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि छात्र केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच की मांग कर रहे हैं तो उनकी मांग का समर्थन किया जाएगा। उनके अनुसार संगठन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत खामियों के खिलाफ संघर्ष कर रहा है, जिनसे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
विपक्षी नेताओं के समर्थन का किया उल्लेख
जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में पहुंचे विपक्षी नेताओं का उल्लेख करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि मंच पर आए नेताओं ने अपने दलों का प्रचार नहीं किया, बल्कि केवल छात्रों के मुद्दों का समर्थन किया। उन्होंने इसे छात्र आंदोलन के प्रति राजनीतिक संवेदनशीलता का संकेत बताया।
संगठन के विस्तार की तैयारी
अभिजीत दीपके ने बताया कि पांच अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में संगठन की बैठक आयोजित होगी, जिसमें सीजेपी के विस्तार और आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि हालिया छात्र आंदोलन के बाद संगठन से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं और अब आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना बनाई जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था और सरकारी खर्च पर उठाए सवाल
उन्होंने भारत और विदेशों की शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि विकसित देशों में शिक्षा का व्यवहारिक पक्ष अधिक मजबूत है, जबकि भारत में अभी भी परीक्षा और अंकों पर अधिक जोर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा पर सरकारी व्यय अपेक्षित स्तर का नहीं है और इस क्षेत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता है। उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है और इसे सुलभ बनाने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।




