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शांति हर व्यक्ति की जिम्मेदारी: मुंबई सम्मेलन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश

मुंबई, 21 मई (वेब वार्ता)। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल सरकारों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग और साझा जिम्मेदारी ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

मुंबई में आयोजित ‘बिलियनेयर्स फॉर पीस’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा कि दुनिया इस समय गहरे वैश्विक बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में प्रत्येक शासनाध्यक्ष पर अपने नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन शांति स्थापित करने का दायित्व केवल सरकारों तक सीमित नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि मानवता आज पहले से कहीं अधिक साझा नियति से जुड़ी हुई है। जलवायु परिवर्तन, महामारी, आर्थिक अस्थिरता, प्रवासन और संघर्ष जैसी चुनौतियां किसी एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहतीं। उनके अनुसार दुनिया का भविष्य अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है और वैश्विक समस्याओं का समाधान भी सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

पूर्व राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में वर्चस्व की सोच के बजाय सहयोग आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया सहयोग और साझेदारी के सिद्धांत पर आगे बढ़े तो शांति और समृद्धि हासिल करना अधिक संभव हो सकता है।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि 21वीं सदी में मानवता तभी वास्तविक प्रगति कर सकेगी, जब सभी देश एक साथ आगे बढ़ने की भावना को अपनाएं। उनके अनुसार वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए साझा सोच, पारस्परिक सम्मान और शांति के प्रति प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

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