नोएडा, 04 जून (वेब वार्ता)। नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. रंजन तोमर ने आरोप लगाया है कि नोएडा प्राधिकरण का भूलेख विभाग सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही संबंधी सूचना उपलब्ध कराने से बच रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर एक आवेदन के जवाब में विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध न होने की बात कही गई है।
डॉ. रंजन तोमर ने अपनी आरटीआई में पूछा था कि यदि नोएडा प्राधिकरण की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद संबंधित तहसीलदार कार्रवाई नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा सकती है तथा शिकायत दर्ज कराने की निर्धारित प्रक्रिया क्या है।
इस संबंध में भूलेख विभाग द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए उत्तर में कहा गया कि मांगी गई सूचना कार्यालय में सृजित नहीं है, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
भूलेख विभाग के इस उत्तर पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि यह जवाब कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि भूमि संबंधी मामलों और अवैध कब्जों की निगरानी से जुड़े विभाग के पास ही यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि अपने दायित्वों का निर्वहन न करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा सकती है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग में अधिकारियों के कर्तव्यों, जिम्मेदारियों तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित होती हैं। ऐसे में सूचना उपलब्ध न होने का दावा पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की भावना के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।
डॉ. तोमर ने कहा कि इस मामले में वह प्रथम अपील सहित अन्य वैधानिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सूचना वास्तव में उपलब्ध नहीं है या फिर नागरिकों को जानकारी देने से बचने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों की रोकथाम, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई तथा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना सुशासन की मूल आवश्यकता है। नागरिकों को ऐसी सूचनाएं प्राप्त करने का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है तथा संबंधित विभागों को पारदर्शिता के साथ जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
डॉ. तोमर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सूचना का अधिकार नागरिकों को प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने का महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान करता है। ऐसे में विभागों की यह जिम्मेदारी है कि वे जनहित से जुड़ी सूचनाओं को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उपलब्ध कराएं और पारदर्शी प्रशासन को मजबूत करें।




