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एनडीएमसी ने शुरू की डी.आर.ओ.पी. पहल, नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली, 12 जून (वेब वार्ता)। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “डी.आर.ओ.पी.” परियोजना का शुभारंभ किया। किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन के सहयोग से शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की प्रभावी व्यवस्था विकसित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया और प्लास्टिक कचरा संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही नई दिल्ली क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन की नई व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ हो गया।

इस अवसर पर परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि, आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग, आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल, किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल सूद, एनडीएमसी की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और बाजार व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी है विशेष जिम्मेदारी

कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ एनडीएमसी क्षेत्र स्थित वाल्मीकि बस्ती से किया था। ऐसे में एनडीएमसी के लिए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रत्येक पहल विशेष महत्व रखती है।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद एनडीएमसी क्षेत्र में संसद भवन, केंद्र सरकार के मंत्रालय, विदेशी दूतावास और राष्ट्रीय महत्व के अनेक संस्थान स्थित हैं। इसलिए यहां संचालित प्रत्येक स्वच्छता अभियान का संदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में पहले भी मिली सफलता

कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इस सहयोग के तहत अब तक 115 एरोबिन स्थापित किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया और 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट का उत्पादन हुआ।

उन्होंने कहा कि इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए अब डी.आर.ओ.पी. परियोजना लागू की जा रही है, जिसके अंतर्गत पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए विशेष डिब्बे लगाए जाएंगे। परियोजना के माध्यम से प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण से लेकर उसके अधिकृत पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी होगी अहम

कुलजीत सिंह चहल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल स्वच्छ भारत, मिशन लाइफ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी, जन-जागरूकता और क्षमता निर्माण के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकेगा तथा लैंडफिल स्थलों पर बढ़ते दबाव को भी घटाया जा सकेगा।

परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार और नगर निकायों के प्रयास तभी सफल होंगे, जब प्रत्येक नागरिक प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण और उचित निस्तारण में सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, व्यापारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से इस अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया।

देश के लिए आदर्श मॉडल बनने की उम्मीद

किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल सूद ने कहा कि तेजी से विकसित होते शहरी परिवेश में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। डी.आर.ओ.पी. परियोजना जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने और मजबूत जमीनी ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने परियोजना के क्रियान्वयन ढांचे और इसके संभावित प्रभावों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक अनुकरणीय शहरी स्थिरता मॉडल बन सकती है।

डी.आर.ओ.पी. परियोजना के शुभारंभ समारोह में एनडीएमसी के विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में नागरिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। कार्यक्रम ने स्वच्छ, हरित और टिकाऊ नई दिल्ली के निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प और जनसहभागिता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

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