-लोक भवन में लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के 912 चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी ने सौंपे नियुक्ति पत्र
लखनऊ, 20 सितंबर (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में अगले छह महीने के दौरान एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री रविवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के तहत चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, पुलिस व्यवस्था में सुधार और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
912 चयनित अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 173 महिलाएं भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनने पर बधाई दी और उनसे पूरी निष्ठा तथा संवेदनशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा की।
उत्तर प्रदेश के नौजवानों के सपनों को साकार करने हेतु आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती 2023 के अंतर्गत पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) एवं पुलिस सहायक… pic.twitter.com/LKu2kmx4V3
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मुख्यमंत्री ने बताया कि शनिवार को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि रविवार को 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर को भी नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग काम नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे, जबकि सरकार नियुक्तियां देने का काम जारी रखेगी।
पारदर्शी चयन से शासन पर बढ़ता है विश्वास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण और पारदर्शी परीक्षा के माध्यम से होता है, तो यह केवल उसके परिवार की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि शासन के प्रति आम जनता के विश्वास का प्रतीक भी बनता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले भर्ती प्रक्रियाओं में भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं के कारण युवाओं में निराशा का माहौल था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय अभ्यर्थियों को बिना सिफारिश और लेनदेन के चयन होने को लेकर संदेह रहता था। उन्होंने दावा किया कि कई भर्तियों में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्ति पत्र दिए जाने जैसी अनियमितताएं सामने आई थीं।
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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए कई सुधार किए गए। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सहित विभिन्न भर्ती संस्थाओं की कार्यप्रणाली में बदलाव किए गए। उन्होंने बताया कि समूह ‘ग’ और ‘घ’ की भर्तियों में साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त की गई, ताकि अभ्यर्थियों को भेदभाव से बचाया जा सके।
नियुक्ति से तैनाती तक भेदभाव नहीं होने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भर्ती के विज्ञापन जारी होने से लेकर परीक्षा, नियुक्ति पत्र वितरण, प्रशिक्षण और जिलों में तैनाती तक किसी अभ्यर्थी को सिफारिश की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभ्यर्थी को उसकी योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर अवसर दिया जाएगा।
आज 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र दे रहे हैं और 22 सितंबर को फिर नियुक्ति-पत्र देने जा रहे हैं।
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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में सेवा का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भर्ती की कई प्रक्रियाएं अभी आगे बढ़ रही हैं और सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की स्थिति से उभरकर अब उन राज्यों में शामिल हो गया है, जो स्वयं को राजस्व अधिशेष वाला राज्य कह सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है।
उन्होंने कहा कि राज्य में नए निवेश आ रहे हैं और युवाओं के लिए रोजगार तथा उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के युवाओं और नागरिकों के सामने अब पहचान का संकट नहीं है।
दंगा और माफिया के दौर से बदली प्रदेश की पहचान : योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और कर्फ्यू की घटनाएं होती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया का प्रभाव प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती बना हुआ था।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश को उपद्रवग्रस्त स्थिति से निकालकर उत्सवपूर्ण वातावरण वाला राज्य बनाने की दिशा में काम किया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आज उत्तर प्रदेश की पहचान कर्फ्यू और माफिया से मुक्त प्रदेश के रूप में बनी है। उन्होंने कुंभ, महाकुंभ, पर्व-त्योहारों और विभिन्न आयोजनों के सफल संचालन में पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश के कई जिलों और कस्बों में परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजने को मजबूर होते थे। उन्होंने दावा किया कि कानून-व्यवस्था में सुधार के कारण अब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लोगों का नजरिया बदला है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली की चर्चा अब देश के अन्य हिस्सों में भी होती है। उन्होंने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के आसपास प्रदेश में पुलिसकर्मियों की संख्या आवश्यकता की तुलना में काफी कम थी। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार कर रिक्त पदों को भरने की दिशा में कदम उठाए हैं।
भर्ती में अनियमितता रोकने के लिए कठोर कानून का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक कराने या भर्ती से जुड़े अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर प्रावधान वाला कानून बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस कानून में आजीवन कारावास और संपत्ति जब्त करने तक के प्रावधान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के साथ पुलिस बल की प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले प्रदेश में एक साथ लगभग छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी, जो अब बढ़कर 60 हजार तक पहुंच गई है।
महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम थी। उनके अनुसार, अब प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 44 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद वर्ष के अंत तक यह संख्या 50 हजार तक पहुंच सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
फॉरेंसिक संस्थान और साइबर थानों का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विधि विज्ञान संस्थान की स्थापना तथा विभिन्न क्षेत्रों में विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की उपलब्धता का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सात शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की गई है। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल और राज्य आपदा मोचन बल का गठन किया गया है। प्रत्येक जिले में साइबर थाने और प्रत्येक थाने में साइबर सहायता डेस्क स्थापित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रांतीय सशस्त्र आरक्षी बल की समाप्त की गई 34 कंपनियों का पुनर्गठन किया गया है। इसके अलावा तीन महिला प्रांतीय सशस्त्र आरक्षी बल बटालियन गठित की गई हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर छह करने की प्रक्रिया चल रही है।
56 जिलों में पुलिस बैरक और आवासीय सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक पुलिस व्यवस्था के लिए केवल प्रशिक्षण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पुलिस लाइनों, बैरकों और आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के 56 जिलों में पुलिस बैरक या पुलिस आवासीय सुविधा वहां की सबसे ऊंची इमारत है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। बदलती तकनीक के अनुरूप पुलिस बल को लगातार अपने कौशल का विकास करना होगा।
912 नियुक्तियां, 912 परिवारों के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले 912 युवा केवल अपने परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गांवों और मोहल्लों के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगे। उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों से यह विश्वास मजबूत होगा कि युवा बिना सिफारिश और लेनदेन के अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी सेवा में प्रवेश कर सकते हैं।
उन्होंने नवचयनित पुलिसकर्मियों से आम जनता की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस सेवा में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
पुलिस सेवा में कर्तव्य पहले, अधिकार बाद में : सुरेश खन्ना
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में कर्तव्य पहले और अधिकार बाद में आते हैं।
सुरेश खन्ना ने नवचयनित पुलिसकर्मियों को आगाह किया कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद उनमें अहंकार नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के व्यवहार और कार्यशैली से ही जनता शासन की कार्यप्रणाली का आकलन करती है।
35 हजार पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जारी : राजीव कृष्ण
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने 912 चयनित अभ्यर्थियों, विशेष रूप से 173 महिला अभ्यर्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी का चयन पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है।
राजीव कृष्ण ने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों का आधारभूत प्रशिक्षण छह अक्टूबर से शुरू होगा। इसके बाद छह महीने का संस्थागत प्रशिक्षण और तीन महीने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों को तैनाती प्रदान की जाएगी।
पुलिस महानिदेशक के अनुसार, वर्तमान में लगभग 35 हजार पदों पर सीधी भर्ती और 9,457 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता भी बढ़कर 60 हजार से अधिक हो चुकी है।
पौधा और प्रतिमा भेंट कर अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पौधा और भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना का पौधा और राम दरबार की प्रतिमा भेंट कर अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से पारंपरिक पुष्पगुच्छ के स्थान पर पौधा भेंट करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश देना है। समारोह में अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, नवचयनित अभ्यर्थी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




