चेन्नई, 04 जून (वेब वार्ता)। मद्रास हाईकोर्ट आज उस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें एआईएडीएमके के कई पूर्व नेताओं ने पार्टी से निष्कासन के खिलाफ दायर अपने मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी है। यह मामला न्यायमूर्ति एन. कुमारेश बाबू की अदालत में सूचीबद्ध है। प्रक्रिया संबंधी कारणों से बुधवार को इस अनुरोध पर सुनवाई नहीं हो सकी थी।
यह मामला वर्ष 2022 में एआईएडीएमके के भीतर उभरे नेतृत्व संघर्ष से जुड़ा है, जब पार्टी दो प्रमुख गुटों में विभाजित हो गई थी। एक पक्ष का नेतृत्व एडप्पादी के. पलानीस्वामी कर रहे थे, जबकि दूसरे पक्ष की कमान ओ. पन्नीरसेल्वम के हाथों में थी। इसी दौरान 11 जुलाई 2022 को पार्टी की अहम जनरल काउंसिल बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक से पहले ओ. पन्नीरसेल्वम ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बैठक पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुई।
जनरल काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे। इनमें ओ. पन्नीरसेल्वम, मनोज पांडियन, जे.सी.डी. प्रभाकर और वैथिलिंगम को पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव भी शामिल था। इसके बाद इन नेताओं ने अपने निष्कासन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब से यह मामला एआईएडीएमके के नेतृत्व विवाद से जुड़े अन्य मामलों के साथ लंबित चल रहा है।
इस बीच राजनीतिक परिस्थितियों में हुए बदलावों ने मामले की दिशा को प्रभावित किया है। जे.सी.डी. प्रभाकर बाद में तमिलगा वेत्री कझगम में शामिल हो गए और वहां उन्हें विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। वहीं ओ. पन्नीरसेल्वम और उनके कुछ समर्थक बाद में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साथ जुड़ गए।
बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों को आधार बनाते हुए जे.सी.डी. प्रभाकर और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में हाईकोर्ट को पत्र भेजकर मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में इस याचिका को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका वापस लेने संबंधी पत्र अभी तक हाईकोर्ट रजिस्ट्री से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी वजह से न्यायमूर्ति एन. कुमारेश बाबू इस अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं ले सके।
मामले की स्थिति को देखते हुए अदालत ने सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी और इसे पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अब निगाहें आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर विचार करते हुए आगे की कार्यवाही और आदेश तय कर सकती है।




