वाशिंगटन, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव को खत्म करने के प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर एक नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से कह चुके हैं कि यदि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो अमेरिका परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष समाप्त करने पर विचार कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यहां समुद्री यातायात बाधित होने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
होर्मुज को लेकर ईरान की अहम भूमिका
संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली समुद्री आवाजाही को प्रभावित किया है। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के युद्धपोतों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं देने की बात भी कही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज में समुद्री यातायात को प्रभावित करने की ईरान की क्षमता अमेरिका पर दबाव बनाने का महत्वपूर्ण साधन बन गई है। मिसाइलों और ड्रोन के जरिए समुद्री मार्गों को बाधित किए जाने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अनिश्चितता बढ़ाई है।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं कई शर्तें
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाघेर जुलघद्र के मुताबिक, अमेरिका को युद्ध स्थायी रूप से समाप्त करना होगा और समुद्री नाकाबंदी हटानी होगी।
ईरान ने क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी की भी मांग की है। इसके अलावा तेहरान की ओर से सभी प्रतिबंध हटाने, विदेशों में जमा ईरानी धन को वापस करने और युद्ध से हुए नुकसान के बदले अरबों डॉलर के मुआवजे की मांग की गई है।
ईरान की अन्य मांगें भी अहम
ईरान ने अमेरिका से धमकी भरी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बंद करने की मांग भी की है। इसके साथ ही ईरान समर्थित क्षेत्रीय समूहों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने की शर्त रखी गई है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की ओर से जहाजों पर प्रतिबंध लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में शुल्क लगाने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के कारण किसी समझौते तक पहुंचने की राह फिलहाल कठिन दिखाई दे रही है।
तेल की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की बड़ी मात्रा का परिवहन होने के कारण यहां तनाव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। समुद्री यातायात बाधित होने की आशंका से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और ऊर्जा बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
अमेरिका के लिए यह मुद्दा घरेलू स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में ट्रंप प्रशासन ऐसा समाधान तलाशना चाहता है, जिससे सैन्य अभियान को समाप्त करते हुए अमेरिकी जनता के सामने इसे रणनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
ट्रंप कर चुके हैं होर्मुज खुलने का दावा
डोनाल्ड ट्रंप हाल के दिनों में कई बार दावा कर चुके हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है और ईरान के साथ समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि, अभी तक दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परमाणु समझौते के बजाय समुद्री मार्ग पर जोर?
रिपोर्ट में किया गया दावा सही साबित होता है तो यह अमेरिकी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। अब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी समझौते को संघर्ष समाप्त करने की प्रमुख शर्त माना जाता रहा है। लेकिन यदि होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करना प्राथमिक लक्ष्य बनता है, तो अमेरिका सैन्य संघर्ष समाप्त करने के लिए अलग रास्ता अपना सकता है।
हालांकि, ईरान की ओर से रखी गई व्यापक शर्तों और अमेरिका के मौजूदा रुख को देखते हुए दोनों देशों के बीच समझौते की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य आने वाले दिनों में कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना रह सकता है।




