नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत की उर्वरक आपूर्ति को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Strait of Hormuz Fertilizer Shipment से जुड़े घटनाक्रम में यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर की महत्वपूर्ण खेप लेकर चार मालवाहक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं और अब भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के आगमन से देश के उर्वरक भंडार को और मजबूती मिलेगी तथा खरीफ सीजन के दौरान किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में उपलब्ध 168.67 लाख टन के मुकाबले काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन के लिए सकारात्मक संकेत है।
- उर्वरक से लदे 4 जहाजों ने सफलतापूर्वक Strait of Hormuz पार किया
- कृष्णापटनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेगी खेप
- भारत का कुल उर्वरक भंडार बढ़कर 196.08 लाख टन हुआ
- खरीफ सीजन के लिए 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक आयात सुनिश्चित
Strait of Hormuz Fertilizer Shipment से भारत को मिली बड़ी राहत
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य हाल के दिनों में वैश्विक तनावों के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे समय में उर्वरकों की महत्वपूर्ण खेप लेकर चार जहाजों का सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार करना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ये जहाज वर्तमान में कृष्णापटनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। बंदरगाहों पर पहुंचते ही उर्वरकों की खेप उतारी जाएगी और उसे देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
उर्वरक भंडार में पिछले साल के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के अनुसार देश में प्रमुख उर्वरकों का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इससे खरीफ सीजन के दौरान संभावित मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
| उर्वरक | 2026 भंडार (लाख टन) | 2025 भंडार (लाख टन) |
|---|---|---|
| यूरिया | 81.44 | 69.21 |
| DAP | 20.92 | 16.00 |
| NPK | 55.91 | 46.13 |
| MOP | 12.68 | 10.68 |
घरेलू उत्पादन और आयात दोनों पर सरकार का फोकस
सरकार ने वैश्विक बाजार में संभावित व्यवधानों के बावजूद किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर घरेलू उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक आयात को भी तेज किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार संकट के बाद घरेलू उत्पादन बढ़कर 133.12 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय बंदरगाहों पर कुल आयात 43.69 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिली।
खरीफ सीजन के लिए 90 लाख टन से अधिक उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित
भारत ने हाल ही में आयोजित वैश्विक निविदा प्रक्रिया में 17.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया का सफल अनुबंध किया है। इसके साथ ही चालू खरीफ मौसम के लिए देश ने वैश्विक बाजार से 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और P&K उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है।
इस रणनीति को सफल बनाने में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने विभिन्न देशों और आपूर्ति मार्गों के साथ समन्वय स्थापित कर आयात के स्रोतों को विविध बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू उत्पादन, बढ़े हुए आयात और पर्याप्त भंडार के कारण भारत फिलहाल उर्वरक आपूर्ति के मोर्चे पर सुरक्षित स्थिति में है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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