नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Mahrang Baloch को पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने हत्या और आतंकवाद से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। दक्षिणी बलूचिस्तान प्रांत की 33 वर्षीय प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच को पिछले वर्ष ग्वादर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया। अदालत के इस फैसले के बाद नागरिक स्वतंत्रता समर्थकों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे असहमति की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। महरंग बलूच की बहन ने फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है।
- पाकिस्तान की अदालत ने महरंग बलूच को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- हत्या और आतंकवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया।
- मामला ग्वादर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।
- झड़प के दौरान अर्धसैनिक बल के एक जवान की मौत हुई थी।
- मानवाधिकार संगठनों ने फैसले की आलोचना की है।
- परिवार ने उच्च अदालत में अपील करने का निर्णय लिया है।
Mahrang Baloch Case: किस मामले में सुनाई गई उम्रकैद?
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा स्थित आतंकवाद-रोधी अदालत ने बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की संस्थापक महरंग बलूच को हत्या और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला पिछले वर्ष ग्वादर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी।
अदालत के फैसले के अनुसार महरंग बलूच कथित रूप से एक “गैर-कानूनी जमावड़े” का हिस्सा थीं और अर्धसैनिक बल के एक सदस्य की हत्या के साझा उद्देश्य में शामिल थीं।
वकील ने अदालत की कार्यवाही पर जताया अविश्वास
महरंग बलूच के वकील ने बताया कि बचाव पक्ष ने अदालत की पिछली सुनवाई का बहिष्कार किया था क्योंकि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं था। उनका कहना है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई और फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी।
महरंग बलूच की बहन नादिया बलूच ने भी कहा कि परिवार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा और न्याय की लड़ाई जारी रखेगा।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| दोषी | महरंग बलूच |
| उम्र | 33 वर्ष |
| संगठन | बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) |
| अदालत | आतंकवाद-रोधी अदालत, क्वेटा |
| सजा | उम्रकैद |
| अगला कदम | उच्च अदालत में अपील |
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद-रोधी कानूनों का उपयोग शांतिपूर्ण विरोध और मानवाधिकार गतिविधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
संगठनों का आरोप है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को केवल उनके शांतिपूर्ण अभियान और नागरिक अधिकारों की आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
कौन हैं महरंग बलूच?
महरंग बलूच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वे बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की संस्थापक मानी जाती हैं और वर्षों से कथित जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार उल्लंघन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं। इसी कारण वे पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही हैं।
हालिया अदालत के फैसले ने एक बार फिर पाकिस्तान में मानवाधिकार, न्यायिक प्रक्रिया और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें उच्च अदालत में होने वाली अपील और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।




