इस्लामाबाद, 10 मई (वेब वार्ता)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के कथित मुख्यालय मरकज बिलाल के पुनर्निर्माण को लेकर नए दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय सेना की कार्रवाई में क्षतिग्रस्त हुए इस परिसर के पुनर्निर्माण का कार्य अब दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस मामले में पाकिस्तान सरकार और उसके कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष भारतीय सेना और वायुसेना की कार्रवाई में जैश ए मोहम्मद के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इसी दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद क्षेत्र में स्थित मरकज बिलाल परिसर भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था। अब दावा किया जा रहा है कि वहां दोबारा निर्माण कार्य चल रहा है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार अप्रैल महीने में ध्वस्त ढांचे को हटाने का कार्य शुरू किया गया था और वर्तमान में नई इमारत की नींव भरने का काम जारी है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसकी निगरानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह कर रहे हैं।
दावों के मुताबिक इस ट्रस्ट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि परिसर की सुरक्षा पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही है और निर्माण स्थल पर बाहरी लोगों की आवाजाही तथा तस्वीरें लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार भारतीय कार्रवाई में मारे गए जैश से जुड़े कुछ आतंकियों को कश्मीर में घुसपैठ के लिए तैयार किया जा रहा था। अब पुनर्निर्माण की खबरों ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवादी ढांचे और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिहाज से गंभीर मामला माना जाएगा। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस तरह की गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।




