चेन्नई, 10 मई (वेब वार्ता)। तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह ने केवल राजनीतिक बदलाव ही नहीं, बल्कि नए वैचारिक संकेतों को लेकर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है। चेन्नई के समुद्र तट के पास आयोजित भव्य समारोह में हजारों समर्थकों की मौजूदगी, थलपति विजय के नारों और मंच पर राहुल गांधी की उपस्थिति के बीच सबसे अधिक चर्चा कार्यक्रम की शुरुआत को लेकर हुई, जहां पारंपरिक ‘तमिल थाई वाजथु’ से पहले ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया।
तमिलनाडु की राजनीति में अब तक राज्य गीत को प्राथमिकता देने की परंपरा रही है। ऐसे में विजय सरकार द्वारा वंदे मातरम से कार्यक्रम का आरंभ करना राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रवादी विमर्श के साथ संतुलन बनाने और केंद्र सरकार के साथ सहयोगात्मक संबंधों का संकेत हो सकता है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन को मंजूरी देते हुए वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने का निर्णय लिया है। नए प्रावधानों के तहत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध माना जाएगा। माना जा रहा है कि विजय द्वारा शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम को प्रमुखता देना इसी बदलते राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल के अनुरूप संदेश देने की कोशिश हो सकती है।
समारोह में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया। कांग्रेस लंबे समय से कई सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी मुद्दों पर भाजपा से वैचारिक मतभेद रखती रही है। ऐसे में विजय के मंच पर राहुल गांधी की उपस्थिति के बीच वंदे मातरम का प्रमुखता से शामिल होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय व्यावहारिक राजनीति के तहत केंद्र के साथ टकराव के बजाय सहयोग की रणनीति अपनाना चाहते हैं। तमिलनाडु देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं, आधारभूत ढांचे तथा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए केंद्र की आर्थिक सहायता और मंजूरी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार चेन्नई मेट्रो विस्तार, रक्षा गलियारा, औद्योगिक कॉरिडोर और नए एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की भूमिका अहम है। ऐसे में विजय सरकार केंद्र के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने की दिशा में शुरुआती संकेत देती दिखाई दे रही है।
तमिलनाडु लंबे समय से द्रविड़ राजनीति और क्षेत्रीय पहचान का मजबूत केंद्र रहा है। यहां भाषा और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों पर केंद्र के साथ कई बार मतभेद भी देखने को मिले हैं। लेकिन विजय ने वंदे मातरम को प्राथमिकता देकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि तमिल पहचान और राष्ट्रीय भावना को साथ लेकर चला जा सकता है।
इसी बीच पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने को भी राजनीतिक बदलाव के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण और पूर्वी भारत में उभर रहे नए राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
विजय के शपथ ग्रहण समारोह के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या तमिलनाडु की राजनीति में एक नए वैचारिक दौर की शुरुआत हो चुकी है, जहां क्षेत्रीय अस्मिता और राष्ट्रीय राजनीति के बीच नया संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है।




