तेहरान, 17 जून (वेब वार्ता)। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि युद्ध समाप्ति को लेकर हुए प्रारंभिक समझौते के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते के लिए नए दौर की वार्ता शुक्रवार से शुरू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक शांति व्यवस्था और अन्य लंबित मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत को दो चरणों में विभाजित किया गया है।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ आयोजित एक बैठक में अराघची ने कहा कि हाल के संघर्ष और सैन्य कार्रवाइयों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापक समझौते तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो गया था। इसी कारण पहले युद्ध समाप्ति से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने और उसके बाद दीर्घकालिक समाधान पर चर्चा करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में युद्धविराम, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विषय, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरान की रोकी गई संपत्तियों की वापसी तथा युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों पर सहमति पत्र को अंतिम रूप दिया गया है। वहीं दूसरे चरण में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों को हटाने और दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते के लिए लगभग 60 दिनों तक वार्ता जारी रहेगी।
अराघची ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य युद्ध की समाप्ति सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार समझौते पर सहमति बनने के बाद युद्ध समाप्त होने की घोषणा कर दी गई थी, जबकि इसकी औपचारिक शुरुआत शुक्रवार से होगी।
विदेश मंत्री ने लेबनान की स्थिति को भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त हो और कब्जे वाले क्षेत्रों से सैन्य बलों की वापसी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान में किसी भी नए सैन्य अभियान या जारी कब्जे को समझौते की भावना के विपरीत माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है कि संघर्ष के सभी पक्ष युद्धविराम का सम्मान करें और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। उनके अनुसार पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि कई सप्ताह तक चली वार्ताओं के बाद अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने युद्ध समाप्ति संबंधी समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित वार्ता सफल रहती है तो इससे न केवल ईरान और अमेरिका के संबंधों में सुधार की संभावना बनेगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।




