तेहरान, 16 जून (वेब वार्ता)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुआ हालिया समझौता युद्ध समाप्त करने और संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अंतिम समझौता अभी शेष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का इस्लामिक गणराज्य हर संभावित परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मसूद पेज़ेश्कियान ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने संदेश में कहा, “जिस बात पर सहमति बनी है, वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।”
उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार का दायित्व अपने नागरिकों की सेवा करना है और यह कार्य अमेरिका के साथ अंतिम समझौता होने या न होने, दोनों परिस्थितियों में जारी रहेगा। उनके अनुसार, राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ तैयार किए गए समझौता ज्ञापन के प्रारूप को अंतिम रूप देने में मोजतबा खामेनेई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों को शामिल करने में सर्वोच्च नेतृत्व के मार्गदर्शन ने निर्णायक योगदान दिया है।
पेज़ेश्कियान ने कहा, “ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।”
उल्लेखनीय है कि 15 जून को ईरान और अमेरिका ने उस समझौता ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की थी, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाने प्रस्तावित हैं। ईरानी पक्ष के अनुसार, इस ज्ञापन में लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का प्रावधान शामिल किया गया है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोमवार को पुष्टि की कि ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापक और अंतिम समझौते को लेकर औपचारिक वार्ता शुरू होने की संभावना है।
ईरान का कहना है कि आगामी बातचीत का उद्देश्य लंबे समय से विवाद का विषय रहे उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालना तथा तेहरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के भविष्य को लेकर सहमति बनाना होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस संभावित अंतिम समझौते पर टिकी हैं, जो पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को नई दिशा दे सकता है।




