भारत-चीन के बीच संतुलन साधेगा बांग्लादेश, ‘फुटबॉल’ नहीं बनने का दिया संदेश

ढाका, 11 मई (वेब वार्ता)। बांग्लादेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपनी विदेश नीति में संतुलित रुख अपनाते हुए भारत और चीन में से किसी एक के पक्ष में झुकाव नहीं दिखाएगी। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि बांग्लादेश चीन और भारत के बीच “फुटबॉल” नहीं बनेगा और हर निर्णय राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

ढाका में आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में हुमायूं कबीर ने कहा कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति व्यावहारिक सोच, संतुलन और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश दुनिया की सभी प्रमुख शक्तियों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है।

हुमायूं कबीर ने कहा कि सरकार किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर रहने की नीति नहीं अपनाएगी। इसके बजाय बांग्लादेश बहुआयामी कूटनीतिक रणनीति के तहत अलग-अलग देशों के साथ संतुलित संबंध विकसित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे नई दिल्ली हो, बीजिंग हो या वाशिंगटन, बांग्लादेश सभी के साथ समान और संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है।

भारत और चीन के साथ संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों देश बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण हैं और सरकार हर मामले में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। उन्होंने चीन को बांग्लादेश का अहम विकास सहयोगी बताते हुए कहा कि बीजिंग की उनकी हालिया यात्रा काफी सकारात्मक रही।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान की “बांग्लादेश सबसे पहले” नीति का उल्लेख करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि इसका अर्थ अलगाववाद नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता, विकास और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति केवल आदर्शवादी नारों पर आधारित नहीं हो सकती, बल्कि उसमें व्यावहारिक दृष्टिकोण भी जरूरी होता है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर बांग्लादेश के रुख पर उन्होंने कहा कि ढाका एक खुले, समावेशी और सहयोगात्मक क्षेत्रीय ढांचे का समर्थन करता है। उन्होंने दोहराया कि बांग्लादेश किसी वैश्विक शक्ति प्रतिद्वंद्विता में किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन व्यापार, समुद्री सुरक्षा, संपर्क व्यवस्था और सतत विकास से जुड़ी क्षेत्रीय पहलों में सक्रिय भागीदारी निभाता रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह बयान दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संतुलन साधने की रणनीति का संकेत है। भारत और चीन दोनों के साथ बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के बीच ढाका अब अपने हितों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

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