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जब नूतन ने खुद गाया था अपना फिल्मी गीत, आज भी दिलों में बसता है यह सदाबहार नगमा

मुंबई, 04 जून (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा की महान अभिनेत्रियों में शुमार नूतन ने अपनी अदाकारी से तो दर्शकों का दिल जीता ही, साथ ही अपने गायन कौशल से भी लोगों को प्रभावित किया। 4 जून 1936 को जन्मी नूतन ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में अपनी पहचान बनाई।

नूतन ने वर्ष 1950 में फिल्म हमारी बेटी से अभिनय की शुरुआत की थी। उस समय उनकी उम्र मात्र 14 वर्ष थी। बाद में फिल्म सीमा ने उन्हें नई पहचान दिलाई और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पहला फिल्म पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उन्होंने अपने लंबे करियर में 70 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई यादगार किरदार निभाए।

अभिनय के साथ गायन में भी थीं पारंगत

बहुत कम लोग जानते हैं कि नूतन एक प्रशिक्षित गायिका भी थीं। उन्होंने संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी और समय-समय पर कई गीतों में अपनी आवाज भी दी। उनके गायन की सबसे चर्चित मिसाल वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म यादगार का गीत ‘बोली सावन की रात’ माना जाता है।

इस फिल्म में नूतन के साथ मनोज कुमार और प्राण प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म का संगीत जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था।

जब नूतन ने गाया अपना ही फिल्मी गीत

फिल्म के गीत ‘बोली सावन की रात’ को नूतन ने स्वयं गाया था। इस गीत में उनके साथ महेंद्र कपूर और मनहर उधास की आवाज भी सुनाई दी थी। बताया जाता है कि जब संगीतकारों ने उन्हें यह गीत गाने का प्रस्ताव दिया तो वह इसे ठुकरा नहीं सकीं।

गीत की मधुर धुन और नूतन की सादगी भरी आवाज ने इसे विशेष बना दिया। चूंकि यह गीत उन्हीं पर फिल्माया जाना था, इसलिए उनकी प्रस्तुति ने इसे और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

‘जिस पथ पे चला’ भी बना था लोकप्रिय

फिल्म का एक और लोकप्रिय गीत ‘जिस पथ पे चला’ था, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। यह गीत भी नूतन पर फिल्माया गया था और आज भी पुराने फिल्मी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद पसंद किया जाता है।

फिल्म के गीतों को गीतकार वर्मा मलिक और इंदीवर ने लिखा था। इन गीतों ने फिल्म की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सफल अभिनेत्री और सम्मानित कलाकार

नूतन ने वर्ष 1959 में भारतीय नौसेना के अधिकारी रजनीश बहल से विवाह किया था। विवाह के बाद भी उन्होंने फिल्मों में सक्रियता बनाए रखी और कई सफल फिल्मों में काम किया। फिल्म मिलन और मैं तुलसी तेरे आंगन की के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला।

वर्ष 1974 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

आज भी याद किए जाते हैं नूतन के गीत और अभिनय

नूतन भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने अभिनय और गायन दोनों क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी फिल्मों के गीत और उनके निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवित हैं। ‘बोली सावन की रात’ जैसे गीत उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण माने जाते हैं और हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की याद दिलाते हैं।

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