हुमा कुरैशी ने भूटान में किया टाइगर नेस्ट ट्रेक, कहा- जीवन बदल देने वाला अनुभव

मुंबई, (वेब वार्ता)। बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने हाल ही में भूटान की पहाड़ियों में स्थित विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्थल टाइगर नेस्ट (पारो टकसांग) की चढ़ाई पूरी कर ली है। उन्होंने इस साहसिक और आध्यात्मिक यात्रा को ‘जीवन बदलने वाला अनुभव’ बताया है। हुमा ने अपने ट्रेक की तस्वीरें और अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसे उनके प्रशंसकों और यात्राप्रेमियों ने खूब सराहा।

क्या है टाइगर नेस्ट ट्रेक?

भूटान का पारो टकसांग, जिसे टाइगर्स नेस्ट के नाम से जाना जाता है, एक पहाड़ की चोटी पर स्थित एक प्रसिद्ध बौद्ध मठ है। यह जगह इतनी ऊँचाई पर स्थित है कि वहां तक पहुँचने के लिए 6.4 किलोमीटर लंबा ट्रेक करना पड़ता है। यह चढ़ाई दोनों ओर मिलाकर लगभग 6 घंटे में पूरी होती है और इसका रास्ता कठिन लेकिन अत्यंत शांत और सुरम्य होता है।

हुमा कुरैशी ने किया अनुभव साझा

हुमा ने इंस्टाग्राम पर अपनी यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए लिखा:

“टाइगर नेस्ट ट्रेक अब मेरी यादों का हिस्सा बन गया है। यह ट्रेक बहुत कठिन था लेकिन उतना ही शांत और सुकून देने वाला भी।”

हुमा ने पहाड़ों में घूमते हुए खुद की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें वह पारो की पहाड़ियों, झरनों और संग्रहालयों में दिख रही थीं। उन्होंने इस यात्रा को न केवल भौतिक चुनौती बल्कि एक मानसिक और आत्मिक यात्रा भी बताया।

फिल्मी करियर में भी बड़ी उपलब्धि

हुमा कुरैशी की आने वाली थ्रिलर फिल्म ‘बयान’ को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) 2025 के लिए आधिकारिक तौर पर चुना गया है। यह फिल्म प्रतिष्ठित ‘डिस्कवरी सेक्शन’ में दिखाई जाएगी, जिसमें पहले भी क्रिस्टोफर नोलन, अल्फोंसो क्वारोन, और बैरी जेनकिंस जैसे दिग्गज फिल्म निर्देशकों की फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं।

फिल्म का निर्देशन विकास रंजन मिश्रा ने किया है। इसमें हुमा के साथ-साथ चंद्रचूड़ सिंह, सचिन खेडेकर, परितोष सैंड, अविजित दत्त, विभोर मयंक, संपा मंडल, स्वाति दास, अदिति कंचन सिंह, और पैरी छाबड़ा जैसे कई प्रतिभाशाली कलाकार शामिल हैं।

हुमा ने इस मौके पर कहा था:

“’बयान’ मेरे लिए एक सपना पूरा होने जैसा है। इस फिल्म में मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला है जिसकी मैं बहुत समय से तलाश में थी।”

यात्रा और आत्मा की खोज

हुमा की भूटान यात्रा केवल एक ट्रेकिंग एडवेंचर नहीं रही, बल्कि यह उनके लिए एक तरह की आध्यात्मिक खोज भी थी। सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने इस यात्रा में खुद से जुड़ने और शांति को अनुभव करने का अवसर पाया।

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