लेख

मीडिया ने होली पर भी चढ़ाए नफरत के रंग!

-शकील अख़्तर- आज क्या प्रासंगिकता है औरंगजेब की? प्रसंग तो है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का और उसके यह कहने का हमने जब भारत...

दलाल स्ट्रीट क्यों हुई लाल?

-डा. वरिंदर भाटिया- बसंत बहार और फाल्गुन के महीने फरवरी ने दुनियाभर में शेयर मार्केट निवेशकों का ब्लड प्रैशर अनियंत्रित कर दिया था। पैसों के...

आखिर कैसे रुकेगा निजी अस्पतालों में मरीजों का ‘शोषण’

-कमलेश पांडेय- चिकित्सा पेशा या स्वास्थ्य व्यवसाय कोई सामान्य पेशा नहीं है बल्कि यह व्यक्तिगत जीवन और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है...

जीआईएस का दिखने लगा असर, मोहन के नेतृत्व में एमपी बन रहा है निवेश का नया गढ़

-हर्षवर्धन पाण्डे- मोहन सरकार की इंवेस्टर्स समिट रंग जमाने लगी है। एक साल के छोटे से कार्यकाल में मोहन सरकार की बेहतर औद्योगिक नीतियों, बुनियादी...
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औरंगजेब के बाद अब तुगलक की बारी

-राकेश अचल- कहते हैं कि जब- सूप तो सूप, छलनी भी बोल उठे तो समझिये कि संकेत अच्छे नहीं हैं। सत्तारूढ़ दल में मुस्लिम शासकों...

रंगों के त्यौहार में वैमनुष्यता की कालिख पोतने की कोशिशें

-डा. रवीन्द्र अरजरिया-  राजनैतिक प्रतिस्पर्धा में होलिका की भूमिका का निर्वहन करते हुए सत्ताधारी पार्टियां मुफ्तखोरी को बढावा देने वाले बजट की चादर बनाकर देश...

डिजिटल होली में रमती-बसती हमारी युवा पीढ़ी!

-सुनील कुमार महला- होली रंगों का त्योहार है। इस बार शुक्रवार 14 मार्च को होली है। हर साल होली का त्योहार चैत्र माह के कृष्ण...

अब महिलाओं के प्रति बदलना होगा नज़रिया

-रमेश सर्राफ धमोरा- भारत वह देश है जहां महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत का खास ख्याल रखा जाता है। अगर हम इक्कीसवीं सदी की बात...
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विकसित राष्ट्र के विकास का आधार स्तम्भ है महिला सशक्तिकरण

-डॉ. मोहन यादव- "नारी अस्य समाजस्य कुशलवास्तुकारा अस्ति" “नारी समाज की आदर्श शिल्पकार है”, भारतीय दर्शन का यह उल्लेख नारी शक्ति और निर्माण का आह्वान है। भारत...

महिला दिवस विशेष: अपनी मंज़िल के लिए अपनी राहें चुनती महिलाएँ

-प्रियंका सौरभ- पिछले दस वर्षों में, युवा भारतीय महिलाओं के लक्ष्यों और महत्त्वाकांक्षाओं में उल्लेखनीय बदलाव आया है, जो उनकी बढ़ती स्वतंत्रता, शैक्षिक उपलब्धियों और...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) पर विशेष: कुसुमा नाइन जिसे किशोरावस्था के अधूरे इश्क ने बनाया दस्यु सुंदरी

-मनोज कुमार अग्रवाल- चार दशक पहले चंबल के बीहड़ों में कुसुमा नाइन खूंखार दस्यु सुंदरी के नाम से जानी जाती थी। कभी उत्तर प्रदेश और...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) पर विशेष: सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले

केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक़ों के लिए। छोटी शुरुआत ही...
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) पर विशेष: महिलाओं से दोयम व्यवहार खत्म हो

-सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"- भारतीय समाज एक ऐसा समाज है जिसमें महिलाओं को प्रारंभ से ही पुरूषों से दबकर रहने को कहा जाता है, चाहे...

औरंगजेब को जिंदा करने की कोशिश

-कुलदीप चंद अग्निहोत्री- औरंगजेब को मरे अरसा हो गया। विदेश के जिन हुक्मरानों ने हिंदुस्तान पर राज किया, उनमें से सबसे ज्यादा निकृष्ट, अत्याचारी और...

पर्यावरण की रक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा के बहिष्कार की आवश्यकता

-राजकुमार सिन्हा- परमाणु ऊर्जा न तो सुरक्षित है, न सतत, और न ही आर्थिक रूप से व्यावहारिक। इसके पर्यावरणीय, सामाजिक और मानवीय नुकसान इसके कथित...
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