नई दिल्ली, 22 जुलाई (वेब वार्ता)। बाजार में खरीदारी के दौरान अधिकांश लोग छुट्टे रुपये मिलने पर उन्हें बिना ध्यान से देखे सीधे जेब में रख लेते हैं। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर कई बार नकली नोट लोगों तक पहुंच जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 50 रुपये के नोट की पहचान के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा चिन्हों की जानकारी साझा की है, जिनकी सहायता से आम नागरिक आसानी से असली और नकली नोट में अंतर कर सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रत्येक मूल्यवर्ग के नोट में विशेष सुरक्षा विशेषताएं दी गई हैं, जिन्हें नकली बनाना आसान नहीं है। 50 रुपये के नोट में भी कई ऐसे सुरक्षा चिन्ह मौजूद हैं, जिनकी जांच कर उसकी प्रामाणिकता का पता लगाया जा सकता है।
50 रुपये के असली नोट की पहचान ऐसे करें
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 50 रुपये के असली नोट में निम्नलिखित प्रमुख सुरक्षा विशेषताएं होती हैं—
- नोट के निचले बाईं ओर 50 अंक का पारदर्शी सुरक्षा चिन्ह दिया गया है, जो प्रकाश के सामने रखने पर स्पष्ट दिखाई देता है।
- नोट पर 50 अंक देवनागरी लिपि में भी अंकित होता है।
- नोट के अग्र भाग के मध्य में महात्मा गांधी का चित्र मुद्रित होता है।
- दाईं ओर भारतीय रिजर्व बैंक की गारंटी, गवर्नर के हस्ताक्षर, भुगतान का वचन तथा भारतीय रिजर्व बैंक का प्रतीक चिन्ह अंकित रहता है।
- ऊपर बाईं ओर मुद्रित क्रमांक छोटे अंकों से प्रारंभ होकर बड़े अंकों तक बढ़ते क्रम में दिखाई देता है।
- नीचे दाईं ओर भी क्रमांक छोटे से बड़े आकार में बढ़ते क्रम में अंकित रहता है।
- नोट के निचले दाईं ओर अशोक स्तंभ का राष्ट्रीय प्रतीक मुद्रित होता है।
संदेह होने पर अवश्य करें जांच
भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर नागरिकों से अपील करता है कि वे मुद्रा पर मौजूद सुरक्षा चिन्हों की जानकारी रखें और किसी भी संदिग्ध नोट को स्वीकार करने से पहले उसकी जांच अवश्य करें। यदि किसी नोट की प्रामाणिकता को लेकर संदेह हो तो उसे प्रकाश के सामने रखकर सुरक्षा विशेषताओं का मिलान किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर नकली नोटों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है। इसलिए जब भी 50 रुपये का नोट प्राप्त हो, उसे ध्यानपूर्वक जांचने के बाद ही लेन-देन में उपयोग करना चाहिए।




