ईंधन कीमतों के खिलाफ गिग वर्कर्स का प्रदर्शन, 20 रुपये प्रति किलोमीटर रेट की मांग

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नई दिल्ली, 15 मई (वेब वार्ता)। देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऐप आधारित डिलीवरी और कैब सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। यूनियन के अनुसार शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक गिग वर्कर्स विभिन्न ऐप बंद रखकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे।

यूनियन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल महंगा होने से सबसे अधिक असर उन लाखों डिलीवरी वर्कर्स और कैब चालकों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह दोपहिया वाहनों और निजी गाड़ियों पर निर्भर है। खाद्य वितरण, किराना वितरण और कैब सेवाओं से जुड़े कर्मचारी लगातार बढ़ते खर्च के कारण आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले वर्कर्स का कहना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनियों की ओर से डिलीवरी शुल्क या प्रति किलोमीटर भुगतान में कोई वृद्धि नहीं की जा रही है। इससे उनकी वास्तविक आय लगातार घटती जा रही है।

यूनियन ने मांग की है कि गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर सेवा दर तय की जाए। यूनियन का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर वर्कर्स की कमाई पर पड़ता है, क्योंकि वाहन का ईंधन, रखरखाव और सर्विसिंग का पूरा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है।

गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स पहले से ही कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। अब ईंधन महंगा होने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां भुगतान बढ़ाने पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेतीं, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

यूनियन के राष्ट्रीय समन्वयक निर्मल गोराना ने बताया कि देशभर में करीब 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स विभिन्न सेवाओं से जुड़े हुए हैं। इनमें खाद्य वितरण, किराना आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों का सीधा असर इन वर्कर्स की दैनिक आय पर पड़ रहा है।

यूनियन ने केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकार को ऐप आधारित कंपनियों के लिए ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे बढ़ती ईंधन कीमतों का पूरा बोझ केवल वर्कर्स पर न पड़े।

यूनियन ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को होने वाला प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य सरकार तथा कंपनियों तक गिग वर्कर्स की आर्थिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

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