नई दिल्ली, 26 जुलाई (वेब वार्ता)। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का खनन एवं निर्माण उपकरण उद्योग विश्व के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार देश में मशीनीकरण का स्तर अभी भी वैश्विक औसत से कम है, जिसके कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और आधुनिक उपकरणों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में देश के खनन एवं निर्माण उपकरण उद्योग का आकार लगभग 17 अरब डॉलर है और यह प्रतिवर्ष 10 से 12 प्रतिशत की दर से विस्तार कर रहा है। सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डों, शहरी अवसंरचना, खनन तथा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में लगातार बढ़ते निवेश से इस उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय वर्ष 2025 के लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2030 तक 9 से 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद भारत में मशीनीकरण का स्तर विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे आधुनिक उपकरणों की मांग और उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि खनन एवं निर्माण उपकरण उद्योग देश के आधारभूत ढांचे और औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उनके अनुसार इस क्षेत्र के अगले चरण के विकास के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग, अधिक निवेश, नवाचार, कौशल विकास तथा कारोबार को और सुगम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले एक दशक में भारत से खनन एवं निर्माण उपकरणों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उद्योग की उपस्थिति मजबूत हुई है। साथ ही डिजिटलीकरण, स्वचालन, विद्युतीकरण और आपस में जुड़े आधुनिक उपकरणों जैसी नई प्रौद्योगिकियां इस क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देंगी।
सीआईआई के खनन एवं निर्माण उपकरण विभाग के अध्यक्ष विवेक भाटिया ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य विश्वस्तरीय अवसंरचना, मजबूत विनिर्माण और आधुनिक खनन व्यवस्था पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि यह उद्योग देश के आर्थिक परिवर्तन में अहम भूमिका निभाएगा और रिपोर्ट घरेलू विनिर्माण, स्थानीयकरण, नवाचार तथा निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए स्पष्ट रणनीतिक दिशा प्रदान करती है।
बीसीजी के प्रबंध निदेशक एवं भागीदार अभिषेक भाटिया ने कहा कि भारत का खनन एवं निर्माण उपकरण उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। भारतीय निर्माताओं के पास वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी क्षमताएं विकसित कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत करने का सुनहरा अवसर है।
रिपोर्ट में सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों पर विशेष बल दिया गया है। इसमें उच्च मूल्य वाले पुर्जों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने, डिजिटल और कम उत्सर्जन वाले उपकरणों को अपनाने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आपूर्ति पारितंत्र विकसित करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार इन कदमों से भारत न केवल अपनी अवसंरचना विकास की गति तेज़ करेगा, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।




