लक्ष्मीकान्त पाठक
*कछौना, हरदोई( वेबवार्ता) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना में बृहस्पतिवार की सुबह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० भवनाथ पांडेय ने औचक निरीक्षण किया। सामुदायिक स्वास्थ्य कछौना में बाउंड्रीवाल न होने के कारण छुट्टा गौवंशों व जलभराव की समस्या बनी रहती है। जिस पर उन्होंने कहा एस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया गया, बजट जारी होते ही कार्य कराया जायेगा। बाउंड्री बनने से परिसर की सुरक्षा व परिसर का कायाकल्प हो जायेगा। वर्तमान समय में स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति बायोमैट्रिक मशीन से लगती है। कछौना में कई वर्षों से एच०सी०एल० फाउंडेशन की तरफ से अल्ट्रासाउंड मशीन मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये सी०एफ०आर० फंड से दी गयी थी। परंतु रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण धूल फांक रही है। पैथोलॉजी में सीबीसी मशीन चालू हो गयी, रीजेंट उपलब्ध हो गया। आवश्यक जांचें मरीजों के लिये अब बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकारी में कई माह से कोई डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण मरीजों को काफी दिक्कत होती थी, जिस पर उन्होंने डॉ० सौरव को अटैच कर दिया है। जो सोमवार व वुधवार मरीजों को देखेंगे। वर्तमान समय में बरसात के मौसम में जलभराव से मच्छरजनित बीमारी मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू बुखार फैलने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिये विशेष संचारी रोग अभियान को मिशन मोड में चलाने का निर्देश दिया। थोड़ी थोड़ी सावधानी से बीमारी से बचाव किया जा सकता है। प्रांगण में घास, झाड़ी, जलभराव को देख नाराजगी जतायी, इसे तत्काल नगर पंचायत से सामंजस्य बनाकर सफाई कराएं। अचानक सुबह मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पहुंचने से स्वास्थ्य कर्मी खडबला गये। आनन फानन में अपनी सीट पर पहुंच गये। वही क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के अध्यक्ष रामखेलावन कनौजिया ने कई मुद्दों पर स्वास्थ्य विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया। ब्लाक पब्लिक हेल्थ यूनिट स्वीकृत होने के बाद अभी तक नहीं बनी है। जिससे मरीजों को जांच के लिये बाहर भटकना पड़ता है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने के कारण एक्स-रे मशीन की नितांत आवश्यकता है। परंतु सुबिधा न होने के कारण मरीज रिफर कर दिये जाते है। जबकि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का शुरुआत का एक घंटा काफी महत्वपूर्ण होता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र व आरोग्य केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलते हैं। इनमें तैनात स्वास्थ्य कर्मी अपने घरों से आते हैं। यहाँ तक कई आरोग्य केंद्रों पर जानवरों को बाँधने व भूसे के ढे़र होने का मामला प्रकाश में आता है। प्रसूति महिलाओं को भर्ती के दौरान नाश्ता व भोजन बाहर से बनकर आता है। आवंटित फर्म केंद्र के द्वारा परिसर में रसोई में न बनाकर बाहर आने से गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। परिसर में कई खराब जर्जर अवस्था में एम्बुलेंस खड़ी हैं। जिससे राजस्व नुकसान के साथ परिसर खराब लगता है।निरीक्षण के दौरान प्रभारी अधीक्षक डॉ० शैलेंद्र शुक्ला, डॉ० राजकुमार, लैब टेक्नीशियन डॉ० विकास वर्मा, डॉ० अखिलेश वर्मा सहित स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद आम जनमानस में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की संभावनाएं बढ़ गयी हैं।




