गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)/तिगरी (अमरोहा), 12 अक्टूबर: गंगा के दोनों तटों पर लगने वाले गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी धाम के मेलों को राजकीय दर्जा मिलने के बाद टेंट सिटी की योजना तो सामने आई, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए रेत में धंसने वाले रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं अब भी सवालों के घेरे में हैं। हर साल जिलाधिकारी से लेकर दूसरे अधिकारी बदल जाते हैं, लेकिन पिछले मेलों की अव्यवस्थाओं से सबक लेकर स्थायी सुधार करने और किसानों से फीडबैक लेने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के चिंतन शिविरों में किसानों ने वीआईपी सेक्टरों और आम श्रद्धालुओं की सुविधाओं के बीच प्राथमिकता के अंतर पर सवाल उठाते हुए किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भागीदारी वाली संयुक्त कमेटी बनाने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि मेले की तैयारियों के दौरान अधिकारी व्यवस्थाओं की जानकारी तो देते हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं और सुझावों को सुनने के लिए प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। हर आयोजन में जिम्मेदार अधिकारी बदलने के साथ व्यवस्थाओं का खाका भी लगभग पुराने ढर्रे पर चलता रहता है। अस्थायी रास्तों, शौचालयों, सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के स्थायी समाधान के बजाय हर साल नई तैयारियों और दावों पर जोर दिया जाता है।
किसानों ने वीआईपी मार्गों पर वाहनों की आवाजाही और आम श्रद्धालुओं के लिए लागू प्रतिबंधों में समानता तथा स्पष्ट नियमों की जरूरत भी उठाई है। उनका सवाल है कि यदि विशेष मार्गों और सेक्टरों की व्यवस्था पहले से तय की जा सकती है, तो लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षित रास्तों, स्वच्छ शौचालयों, पेयजल, रोशनी, महिलाओं के लिए कपड़े बदलने की जगह और सुलभ ठहराव को भी उतनी ही प्राथमिकता क्यों नहीं दी जाती?
भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) की मांग है कि जिला पंचायत, क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों की पहल पर किसानों, ग्रामीणों, स्थानीय व्यापारियों तथा मेले से जुड़े अन्य पक्षों की संयुक्त कमेटी बनाई जाए। कमेटी पिछले आयोजन की कमियों और लोगों के सुझावों का लिखित रिकॉर्ड तैयार करे, सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बने और मेले के बाद यह भी सार्वजनिक हो कि उठाई गई समस्याओं पर कितना काम हुआ। सवाल यही है कि गंगा के इन बड़े मेलों की योजना वीआईपी सुविधाओं को केंद्र में रखकर बनेगी या आम श्रद्धालु और स्थानीय लोगों की जरूरतें भी व्यवस्था की प्राथमिकता बनेंगी।
राजकीय दर्जे के बाद टेंट सिटी ही नवाचार, व्यवस्थाओं का ढर्रा वही!
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