कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग (डर्मेटोलॉजी) विभाग द्वारा फंगल इंफेक्शन के मरीजों पर किए गए एक विशेष सर्वे में गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 6 सप्ताह से अधिक पुराने इंफेक्शन से पीड़ित 200 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि इनमें से 114 मरीज बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीमों का इस्तेमाल कर रहे थे।
सर्वे के अनुसार, मरीज लोबेट जीएम, सल्फाज़ एसएन, पैंडर्म, क्वाड्रिडर्म, केटी 5 और बेटनोवेट जैसी चर्चित क्रीमों का उपयोग कर रहे थे। मरीजों ने स्वीकार किया कि वे ये क्रीम मेडिकल स्टोर संचालकों, रिश्तेदारों या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति (झोलाछाप) की सलाह पर खरीद रहे थे। शुरुआत में इन क्रीमों से राहत महसूस होती थी, लेकिन जैसे ही इनका इस्तेमाल बंद किया जाता, समस्या पहले से भी अधिक गंभीर होकर उभर आती थी।
चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. डी. पी. शिवहरे ने बताया कि स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग करने वाले मरीजों में कई तरह के साइड इफेक्ट्स देखे गए। 26 मरीजों की त्वचा पर गहरे स्ट्रैच मार्क्स (निशान) बन गए थे। 57 मरीजों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील (सेंसिटिव) हो गई थी, जिससे त्वचा पर लालिमा और तेज खुजली की समस्या उत्पन्न हो गई। 15 मरीजों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण मवाद वाले छोटे-छोटे दाने निकल आए थे। तो वहीं 36 मरीज इस क्रीम की लत से परेशान थे और इससे छुटकारा पाना चाहते थे, क्योंकि क्रीम बंद करते ही खुजली व जलन असहनीय हो जाती थी। सर्वे में एक भी ऐसा मरीज नहीं मिला, जिसका फंगल इंफेक्शन इन क्रीमों के इस्तेमाल से पूरी तरह ठीक हुआ हो। वहीं, जो मरीज स्टेरॉयड का प्रयोग नहीं कर रहे थे, उन्होंने भी सही समय तक इलाज पूरा नहीं किया और थोड़ा आराम मिलते ही दवाएं बीच में ही बंद कर दी थीं।
विशेषज्ञ से ही कराएं इलाज
चर्म रोग विभागध्यक्ष डॉ. शिवहरे ने स्पष्ट किया कि यह सर्वे आम जनता में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। फंगल इंफेक्शन पर स्टेरॉयड क्रीम लगाने से त्वचा पतली और संवेदनशील हो जाती है, जिससे इंफेक्शन को ठीक होने में दोगुना समय लगता है। उन्होंने अपील की है कि मरीज अपनी मर्जी से या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति के कहने पर फंगल इंफेक्शन के लिए कोई भी क्रीम न लगाएं। केवल त्वचा रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अपना इलाज कराएं और डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवाएं बंद करें।




