#डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग, 1978 के न्यायालय आदेश, राजस्व अभिलेख और पुराने नक्शों के आधार पर हकीकत सामने लाने की मांग#
ललितपुर, (आलोक चतुर्वेदी) जिले के ऐतिहासिक गुसाईं मठ की भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर मामला गरमा गया है। मामले में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने भूमि की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए पुराने राजस्व अभिलेखों, नगरग्राम अभिलेखों, नक्शों तथा न्यायालय के आदेश संख्या 131/1978 का परीक्षण कराने की मांग की है।
मोहल्ला चौबयाना निवासी एवं हिन्दू राष्ट्र प्रांत पर्यावरण प्रमुख रामेश्वर मालवीय ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि गुसाईं मठ से संबंधित भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर निर्माण किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित भूमि के संबंध में पूर्व में न्यायालय द्वारा पारित आदेश संख्या 131/1978 में भूमि एवं उससे जुड़े पक्षों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में उक्त आदेश के साथ पुराने राजस्व अभिलेखों और वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाना आवश्यक है।
पुराने नक्शे और अभिलेखों से हो हकीकत की पड़ताल
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित भूमि के पुराने राजस्व अभिलेख, नगरग्राम अभिलेख, नक्शे एवं अन्य उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए। साथ ही न्यायालय के आदेश संख्या 131/1978 को आधार बनाकर अभिलेखीय स्थिति की वर्तमान मौके की स्थिति से तुलना कराई जाए।
उन्होंने प्रशासनिक एवं राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मौके का स्थलीय निरीक्षण और विधिवत सीमांकन कराए जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि कागजी अभिलेखों के साथ मौके की स्थिति का मिलान होने के बाद ही भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
धार्मिक भूमि की सुरक्षा पर कार्रवाई की मांग
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान यह प्रमाणित होता है कि किसी सरकारी अथवा धार्मिक भूमि पर बिना वैध अधिकार के अतिक्रमण या निर्माण किया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही अतिक्रमण पाए जाने की स्थिति में उसे हटाकर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जांच की अपेक्षा
शिकायतकर्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी एवं सार्वजनिक संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने और अवैध कब्जों के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व से जुड़े गुसाईं मठ की भूमि के संबंध में भी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच होना जरूरी है।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले में अभिलेखों का मिलान, स्थलीय निरीक्षण, सीमांकन और न्यायालय के पुराने आदेश का परीक्षण कराकर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और वर्तमान में किया गया कथित निर्माण अथवा कब्जा वैध है अथवा नहीं।
अब इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन की जांच पर निगाहें टिकी हैं। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही गुसाईं मठ की भूमि से जुड़े पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
गुसाईं मठ की जमीन पर कथित कब्जा-निर्माण का आरोप, पुराने अभिलेखों से खुलेगा राज!

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