वेब वार्ता

अमरोहा, 07 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होते ही राजनीतिक दलों का गांवों की ओर रुख बढ़ने लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान और ग्रामीण मतदाता राजनीतिक दलों के लिए फिर केंद्र में हैं। ऐसे में गन्ना किसानों के वर्षों से लंबित विलंब ब्याज के सवाल पर अब तक बरती गई खामोशी को लेकर भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) की ‘किसान युवा संसद’ ने राजनीतिक दलों से सीधा सवाल किया है कि जब किसान के अधिकार की बात थी तब आवाज क्यों नहीं उठी और अब वोट की बारी आई तो गांव-गांव पहुंचने की इतनी बेचैनी क्यों है? पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान पहुंच और सामाजिक समूहों के बीच संपर्क पहले ही चुनावी तैयारियों का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि किसानों के विलंब ब्याज का मुद्दा किसी चुनावी मौसम में पैदा नहीं हुआ। किसान युवा संसद लगातार गांवों में इस सवाल को उठा रही है और किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही है। बुधवार को गजरौला में किसानों ने आपस में लड्डू बांटकर खुशी जताई, लेकिन इस खुशी के साथ राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल भी खड़े किए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही किसानों के दरवाजे पर दस्तक देने वाले राजनीतिक दलों को यह भी बताना चाहिए कि जब किसानों की वर्षों पुरानी रकम पर ब्याज के अधिकार का सवाल उठा था, तब उनकी आवाज कहां थी। किसान को चुनाव के समय याद करना और बाकी समय उसके वास्तविक आर्थिक सवालों पर मौन रहना इस दोहरे रवैये पर अब गांव की चौपालों में सवाल पूछे जाएंगे।
किसान युवा संसद ने कहा कि गन्ने का भुगतान केवल मूल रकम का हिसाब नहीं है। समय पर भुगतान न मिलने से किसान की पूंजी वर्षों तक अटकती है और विलंब ब्याज उसी आर्थिक नुकसान से जुड़ा अधिकार है। इसके बावजूद चीनी मिलों, सरकार, सत्ता पक्ष और विपक्ष समेत राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर अपेक्षित मुखरता दिखाई नहीं दी। किसान संगठनों की चुप्पी भी कम हैरान करने वाली नहीं है।
नरेश चौधरी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनावी मौसम में गांवों की पगडंडियां नेताओं को दिखाई देने लगती हैं, लेकिन किसान के भुगतान और ब्याज का सवाल उठते ही वही पगडंडियां जैसे गायब हो जाती हैं। किसान युवा संसद अब यह सवाल गांव-गांव ले जाएगी कि वोट मांगने आने वाले लोग किसानों के लंबित अधिकारों पर अपनी स्पष्ट स्थिति भी बताएंगे या केवल चुनावी वादों की गठरी लेकर आएंगे।
उन्होंने कहा कि किसान किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। किसान युवा संसद का उद्देश्य किसानों को किसी दल के पक्ष या विपक्ष में खड़ा करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने सवाल पूछने का हक और हौसला देना है। संगठन ने कहा कि अब गांव में केवल यह नहीं पूछा जाएगा कि चुनाव में कौन क्या देने का वादा कर रहा है, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि किसान के पुराने हक के लिए किसने कब और कितनी आवाज उठाई।
संगठन ने कहा कि किसानों के मुद्दे चुनावी घोषणा-पत्रों की शोभा बनने के बजाय सत्ता और विपक्ष दोनों की जवाबदेही का विषय बनने चाहिए। विलंब ब्याज के सवाल पर किसानों की आवाज दबने वाली नहीं है। किसान युवा संसद गांव-गांव पहुंचकर इस मुद्दे पर किसानों को जागरूक करने और राजनीतिक दलों से जवाब मांगने का अभियान जारी रखेगी।
गजरौला स्थित फाजलपुर कार्यालय पर मिष्ठान वितरण के मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के साथ ही राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, जिला संरक्षक चौधरी चरण सिंह, जिला उपाध्यक्ष जसवंत सिंह, गजरौला ब्लॉक अध्यक्ष तालिब रजा फौजी, ब्लॉक उपाध्यक्ष निराजुद्दीन चौधरी, होमपाल सिंह, चंद्रपाल सिंह आदि ‘किसान युवा संसद’ के युवा मौजूद रहे।




