लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई (वेब वार्ता)रसखान प्रेक्षागृह रविवार को कर्ण के शौर्य, स्वाभिमान और संघर्ष का साक्षी बना। भारतेन्दु नाट्य अकादमी, जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ का भव्य मंचन हुआ। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को कथा से इस कदर जोड़ा कि ‘कृष्ण की चेतावनी’ और ‘कर्ण-कुंती संवाद’ जैसे दृश्यों पर प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्र ‘मधुर’ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ‘रश्मिरथी’ महज काव्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। कर्ण का चरित्र विपरीत परिस्थितियों में भी पराक्रम, स्वाभिमान और दानशीलता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारतेन्दु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने कर्ण, कृष्ण, कुंती, दुर्योधन और परशुराम के पात्रों को मंच पर साकार किया। मानवेन्द्र कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में हुए मंचन में कर्ण के जीवन की पीड़ा, सामाजिक संघर्ष और अदम्य साहस को प्रभावशाली ढंग से उभारा गया।
नाटक के दौरान कर्ण के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं ने दर्शकों को बांधे रखा। विशेष रूप से कृष्ण और कर्ण के बीच संवाद तथा कुंती-कर्ण प्रसंग ने भावनात्मक प्रभाव छोड़ा। मंचन समाप्त होने के बाद भी दर्शकों की तालियां कलाकारों के अभिनय की गवाही देती रहीं।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती और भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, साहित्य प्रेमियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों ने नाटक का आनंद लिया।
दर्शकों ने हरदोई में इस तरह के साहित्यिक और उच्चस्तरीय रंगमंचीय आयोजन को सराहनीय पहल बताया। उनका कहना था कि ऐसे मंचन नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत से सीधे जोड़ते हैं।
मंचन के बाद सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं परियोजना निदेशक डीआरडीए अशोक कुमार रहे। इस अवसर पर नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, जिला पर्यटन अधिकारी दीपांकर चौधरी सहित संस्कृति विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
हरदोई में मंच पर जीवंत हुआ कर्ण का संघर्ष, ‘रश्मिरथी’ ने जीता दर्शकों का दिल

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