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“काला पानी की यातनाएं भी नहीं तोड़ सकीं हौसला, हरदोई में याद किए गए क्रांतिकारी जयदेव कपूर”

लक्ष्मीकान्त पाठक

हरदोई 19 सितम्बर (वेबवार्ता)अंग्रेजी हुकूमत की सलाखें, अंडमान की सेल्युलर जेल की कठोर यातनाएं और देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देने का जज्बा—क्रांतिकारी जयदेव कपूर की पुण्यतिथि पर शनिवार को हरदोई में उनका संघर्ष एक बार फिर जनस्मृति में जीवंत हो उठा। जिन्दपीर चौराहा स्थित रेडियो जागो 90.4 एफएम स्टूडियो में आयोजित श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम में उनके जीवन, क्रांतिकारी गतिविधियों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जयदेव कपूर के पुत्र संजय कपूर और पौत्र मयूर कपूर उपस्थित रहे। संजय कपूर ने अपने पिता के जीवन से जुड़े अनेक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई केवल इतिहास की किताबों में दर्ज घटनाओं का नाम नहीं, बल्कि उन असंख्य बलिदानों की गाथा है, जिनकी कीमत क्रांतिकारियों ने अपना जीवन देकर चुकाई।उन्होंने बताया कि अंडमान में काला पानी की सजा के दौरान जयदेव कपूर को सश्रम कारावास के साथ कठोर शारीरिक यातनाएं भी झेलनी पड़ीं। उन्होंने दावा किया कि वहां लगे प्रतीक चिह्न पर स्वर्गीय जयदेव कपूर का नाम प्रमुख रूप से अंकित है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्रांतिकारियों के संघर्ष और त्याग को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।

भगत सिंह के साथ क्रांतिकारी सफर का महत्वपूर्ण अध्याय

कार्यक्रम में वक्ताओं ने जयदेव कपूर के क्रांतिकारी जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्हें भगत सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहने वाले क्रांतिकारियों में याद किया गया।
वक्ताओं ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा से जुड़े क्रांतिकारी प्रसंग, ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में हुई गतिविधियों तथा अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। काकोरी कांड से जुड़े राम प्रसाद बिस्मिल को जेल से छुड़ाने के प्रयासों, दिल्ली विधानसभा बम प्रकरण और सहारनपुर में बम निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का भी स्मरण किया गया।
जयदेव कपूर के जीवन का एक बड़ा हिस्सा अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल में बीता। कार्यक्रम में वहां झेली गई कठोर परिस्थितियों और कारावास के दौरान उनके संघर्ष को विशेष रूप से याद किया गया।

कुश्ती से लेकर क्रांति तक—दृढ़ व्यक्तित्व की कहानी

वक्ताओं ने बताया कि जयदेव कपूर ने युवावस्था में छोटे महाराज और ठाकुर राम सिंह के मार्गदर्शन में कुश्ती का प्रशिक्षण भी लिया था। उनके व्यक्तित्व में शारीरिक दृढ़ता, अनुशासन, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अनूठा मेल दिखाई देता था।वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। हरदोई की धरती से जुड़े क्रांतिकारियों की गाथाएं नई पीढ़ी को अपने इतिहास और स्वतंत्रता के वास्तविक संघर्ष से जोड़ सकती हैं।

जयदेव कपूर पर वीडियो एल्बम की वर्ल्ड वाइड रिलीज

कार्यक्रम के दौरान “जयदेव कपूर” नामक वीडियो एल्बम की वर्ल्ड वाइड रिलीज भी की गई। बताया गया कि यह वीडियो एल्बम जयपुर, कोलकाता और यूरोप के लॉस एंजिल्स में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक प्रवेश प्राप्त कर चुका है।
जयदेव कपूर के पुत्र संजय कपूर ने यूट्यूब पर प्ले बटन दबाकर एल्बम का विमोचन किया। जी म्यूजिक हरदोई के को-प्रोड्यूसर अमन सिंह ने बताया कि एल्बम के माध्यम से जयदेव कपूर के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके संघर्ष और योगदान को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि जी म्यूजिक हरदोई हरदोई की पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने लोगों से यूट्यूब पर “जयदेव कपूर फ्रीडम फाइटर” सर्च कर वीडियो देखने और दूसरों को भी देखने के लिए प्रेरित करने की अपील की।

रेडियो जागो में सुरक्षित हैं जयदेव कपूर से जुड़े चित्र और दस्तावेज

आयोजकों ने बताया कि रेडियो जागो 90.4 एफएम और जी म्यूजिक हरदोई की टीम का उद्देश्य हरदोई की धरती से जुड़े क्रांतिकारी जयदेव कपूर के जीवन, संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है। रेडियो जागो एफएम कार्यालय में जयदेव कपूर से संबंधित अनेक चित्र और दस्तावेज भी संरक्षित किए गए हैं।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता अभय शंकर गौड़, पतंजलि योगपीठ महिला प्रमुख विनीता पांडेय, जी म्यूजिक हरदोई टीम के डॉ. गौरव अग्रवाल, अमन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने जयदेव कपूर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन-संघर्ष को याद किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और उसमें योगदान देने वाले क्रांतिकारियों की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अभियान जारी रखा जाएगा।

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