नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 (वेब वार्ता)। नई दिल्ली में रविवार, 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। हालांकि, सम्मेलन के दौरान वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के संबंधों में नरमी का संकेत सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में रहा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि दोनों देश अब बीती बातों को पीछे छोड़कर अपने साझा भविष्य पर ध्यान देना चाहते हैं।
पेजेशकियान ने यह बयान उस मुलाकात के एक दिन बाद दिया, जो उन्होंने शनिवार, 12 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन संयुक्त अरब अमीरात के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ की थी। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई यह मुलाकात दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे उच्चस्तरीय बैठकों में से एक मानी जा रही है।
यूएई के साथ संबंध सुधारने पर जोर
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा कि युद्ध और फारस की खाड़ी में हुई घटनाओं के बाद पहली बार उनकी अबू धाबी के युवराज के साथ रचनात्मक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि पुरानी घटनाओं को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखा जाना चाहिए।
पेजेशकियान के अनुसार, दोनों देश मिलकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके इस बयान को ईरान और यूएई के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़ा था तनाव
ईरान और यूएई के बीच संबंधों में तनाव उस समय और बढ़ गया था जब इस वर्ष फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया।
इस घटनाक्रम का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात पर भी पड़ा। ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद अबू धाबी की ओर से तेहरान के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया। अगस्त में यूएई ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेन-देन को निलंबित करने की घोषणा की थी।
ऐसे माहौल में नई दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पश्चिम एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन बना कूटनीतिक संवाद का मंच
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और यूएई के नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई, जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारत की राजधानी में आयोजित सम्मेलन ने दोनों नेताओं को आमने-सामने बातचीत का अवसर दिया।
ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के युवराज की बातचीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और वित्तीय संबंधों पर पड़ा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद की शुरुआत क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकती है।
संबंधों में सुधार के संकेत
पेजेशकियान का बयान संकेत देता है कि तेहरान अब यूएई के साथ संबंधों में सुधार को लेकर सकारात्मक रुख अपना रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार और वित्तीय संबंधों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए अभी कई व्यावहारिक और कूटनीतिक कदम उठाने होंगे।
नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय मुलाकात से यह उम्मीद जरूर जगी है कि ईरान और यूएई तनाव कम करने के लिए संवाद का रास्ता आगे भी खुला रख सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो इसका असर व्यापक खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।




