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टीएमसी के बागी सांसदों में भी दरार, यूसुफ पठान समेत तीन ने भाजपा से बनाई दूरी

नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के गुट में भी अब मतभेद उभरने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्व क्रिकेटर और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान समेत मुर्शिदाबाद क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों से निर्वाचित सांसद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से दूरी बनाए हुए हैं। इन सांसदों में मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान और जंगीपुर से खलीलुर रहमान भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, तीनों सांसदों को आशंका है कि भाजपा के साथ खुलकर नजदीकी बढ़ाने से उनके पारंपरिक मतदाता आधार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खासतौर पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन सांसदों का मानना है कि भाजपा के साथ राजनीतिक निकटता उनके क्षेत्र में उनके समर्थन को कमजोर कर सकती है।

भाजपा से नजदीकी को लेकर असंतोष

बताया जा रहा है कि यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों को लेकर सतर्क हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं और ऐसे में भाजपा के साथ किसी भी प्रकार की खुली राजनीतिक निकटता को लेकर वे सावधानी बरत रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इन सांसदों का मानना है कि भाजपा के करीब जाने से उनके क्षेत्र के मतदाताओं में गलत संदेश जा सकता है। इसी वजह से बागी सांसदों के समूह के भीतर राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं।

राजग की बैठक से तीनों सांसद रहे दूर

हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई राजग की बैठक में यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान के शामिल नहीं होने की बात सामने आई। हालांकि, दिल्ली में शुभेंदु अधिकारी की ओर से आयोजित बैठक में तीनों सांसदों के पहुंचने की जानकारी है।

बताया गया कि इस बैठक में शामिल होने का उद्देश्य भाजपा के साथ राजनीतिक नजदीकी बढ़ाना नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल से जुड़े कुछ स्थानीय और जनहित के मुद्दों को सामने रखना था। इनमें मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से जुड़ा विषय भी शामिल था।

अबू ताहिर खान ने राजग में शामिल होने से किया इनकार

मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान ने हाल में स्पष्ट किया कि वह राजग का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सहयोगी दलों के सांसदों के लिए आयोजित नाश्ते की बैठक में शामिल हुए थे।

अबू ताहिर खान के मुताबिक, प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने का उद्देश्य अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को सीधे उनके सामने रखना था। उन्होंने इसे राजग के समर्थन के संकेत के तौर पर देखने से इनकार किया।

उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने, मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी और अपने संसदीय क्षेत्र में नई रेलवे लाइन की मांग जैसे मुद्दों को उठाने की बात कही।

बोले- जनता के मुद्दे उठाने के लिए गए थे

अबू ताहिर खान ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक उनके लिए अपनी चिंताओं और क्षेत्रीय समस्याओं को सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने का अवसर थी। उन्होंने इस मुलाकात को भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के प्रति समर्थन के रूप में देखे जाने से इनकार किया।

उनका कहना है कि किसी बैठक में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित सांसद किसी गठबंधन का हिस्सा बन गया है। उनके अनुसार, सांसद के तौर पर अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सरकार के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है।

कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी अब भी ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने बागी सांसदों पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है।

कल्याण बनर्जी का कहना है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर स्वयं को नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का सदस्य बताया है। उनका दावा है कि यह दल पहले से ही राजग का हिस्सा है। ऐसे में बागी सांसदों की राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आगे की रणनीति पर निगाह

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों की भूमिका को लेकर पहले से ही चर्चा तेज है। अब बागी गुट के भीतर ही भाजपा और राजग के साथ संबंधों को लेकर मतभेद सामने आने की खबर ने राजनीतिक तस्वीर को और जटिल कर दिया है।

यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान जैसे सांसदों का अपने-अपने क्षेत्रों में अलग राजनीतिक आधार है। ऐसे में भाजपा के साथ उनकी दूरी और बागी गुट की आंतरिक स्थिति आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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