राज्यहरियाणामोदी-सुखबीर मुलाकात के सूत्रधार बने नायब सैनी, भाजपा-अकाली...

मोदी-सुखबीर मुलाकात के सूत्रधार बने नायब सैनी, भाजपा-अकाली गठजोड़ की फिर जगी उम्मीद

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 09 अगस्त (वेब वार्ता)। पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच एक बार फिर नजदीकियां बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की हालिया मुलाकात के पीछे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले चार अगस्त को चंडीगढ़ में नायब सिंह सैनी और सुखबीर सिंह बादल के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई थी। इसके बाद ही सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का रास्ता साफ होने की चर्चा है।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने नायब सिंह सैनी को पंजाब में संभावित राजनीतिक गठजोड़ की संभावनाएं तलाशने और विभिन्न दलों तथा नेताओं से संवाद स्थापित करने की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में सैनी और सुखबीर बादल की मुलाकात को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित पुनर्गठबंधन की दिशा में अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब में सियासी बर्फ पिघलने के संकेत

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब दौरे के दौरान जालंधर में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भरोसा रखने वाले दलों और नेताओं के लिए भारतीय जनता पार्टी के दरवाजे खुले हैं। उनके इस बयान के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित नजदीकी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।

इसके कुछ ही समय बाद सैनी और सुखबीर बादल की चंडीगढ़ में हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को और बल दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर बादल के बीच बैठक हुई। हालांकि दोनों दलों की ओर से किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही राजनीतिक गतिविधियों को भविष्य के समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोदी और सुखबीर की मुलाकात में पंजाब के मुद्दों पर चर्चा

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर बादल की बैठक में पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सुखबीर बादल ने पंजाब में कानून-व्यवस्था, अपराध और गिरोहबाजी, किसान संगठनों, कारोबारियों, उद्यमियों तथा कर्मचारियों से जुड़े विषय प्रधानमंत्री के समक्ष रखे।

बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन संबंधी विधेयक को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आई है। शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र लोकसभा सदस्य हरसिमरत कौर बादल के समर्थन को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श होने की जानकारी है।

प्रकाश सिंह बादल का भी हुआ जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल के बीच लंबे समय से आत्मीय राजनीतिक संबंध रहे हैं। मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से जुड़े कुछ प्रसंगों का भी जिक्र हुआ।

अप्रैल 2019 में वाराणसी में लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंचे नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के वरिष्ठ नेता के रूप में मौजूद प्रकाश सिंह बादल के पैर छूकर उनका अभिवादन किया था। दोनों नेताओं के पुराने संबंधों को देखते हुए प्रकाश सिंह बादल का संदर्भ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भी खास महत्व रखता है।

भाजपा और अकाली दल का रहा है लंबा साथ

भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में गठबंधन के प्रमुख सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने 1997, 2007 और 2012 में मिलकर पंजाब में सरकार बनाई थी। इससे पहले 1970 में भी अकाली दल की सरकार को जनसंघ का समर्थन मिला था।

हालांकि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद गहरा गए। इसके बाद शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। कृषि कानूनों के विरोध के दौरान दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी काफी बढ़ गई थी।

ग्रामीण सिख आधार और शहरी प्रभाव को जोड़ने की कोशिश

पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठजोड़ की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों दलों के पारंपरिक राजनीतिक आधार अलग-अलग रहे हैं। अकाली दल का प्रभाव मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और सिख मतदाताओं के एक बड़े वर्ग में रहा है, जबकि भाजपा का आधार पंजाब के शहरी क्षेत्रों में मजबूत माना जाता है।

यदि दोनों दल फिर से साथ आते हैं तो ग्रामीण और शहरी राजनीतिक आधार को एक मंच पर लाने की रणनीति सामने आ सकती है। हालांकि सीटों के बंटवारे, साझा राजनीतिक कार्यक्रम और कृषि तथा पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर दोनों दलों के रुख जैसे विषय संभावित गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन नायब सिंह सैनी की सक्रियता, सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और दोनों दलों के बीच बढ़ते संवाद ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जरूर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -