भोपाल, 04 अगस्त (वेब वार्ता)। भोपाल में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले पर 5 अगस्त को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान प्रभावित रहवासी वीडियो माध्यम से जुड़कर अपने पक्ष में तस्वीरें और वीडियो प्रस्तुत करेंगे।
शहर के अरेरा कॉलोनी सहित कई आवासीय क्षेत्रों के रहवासियों का आरोप है कि वर्षों से आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र की मूल आवासीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस संबंध में पूर्णेंदु शुक्ला सहित अन्य रहवासियों ने उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की है।
सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती के बाद नगर निगम ने हाल ही में कई प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया था। इसके बाद कुछ व्यापारियों ने स्वयं भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद अधिकांश प्रतिष्ठान फिर से खुल गए।
मुख्यमंत्री ने मामले की व्यापक समीक्षा के लिए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अध्ययन कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन अवैध प्रतिष्ठानों को सील करने के लिए नोटिस जारी किए थे, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई पूरी तरह नहीं की गई। उनका आरोप है कि कई प्रतिष्ठान दोबारा संचालित होने लगे हैं, जो न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि भोपाल में लंबे समय से नया विकास प्रारूप लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों के सामने व्यावसायिक स्थानों का अभाव है। उन्होंने सरकार से शीघ्र नया विकास प्रारूप लागू करने और गुजरात की तर्ज पर मिश्रित भूमि उपयोग व्यवस्था लागू करने की मांग की, ताकि व्यापारियों और रहवासियों दोनों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री की बैठक से पहले अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां सहित कई क्षेत्रों के रहवासियों ने संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में पैदल मार्च निकालकर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई।
उधर, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने व्यापारियों के पक्ष में मिश्रित भूमि उपयोग व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल और सचिव अजय देवनानी का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया विकास प्रारूप लागू नहीं होने से शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड विकसित नहीं हो सके। इसके कारण हजारों व्यापारी मजबूरी में आवासीय परिसरों से ही अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।
चैंबर का कहना है कि इन प्रतिष्ठानों से नियमित रूप से व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर, विद्युत शुल्क तथा अन्य करों का भुगतान किया जा रहा है, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में इस समस्या का स्थायी समाधान नई नीति और विकास प्रारूप के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।




