राष्ट्रीयसंसद में राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’...

संसद में राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ बयान पर हंगामा, टिप्पणी कार्यवाही से हटाई गई

नई दिल्ली, 29 जुलाई (वेब वार्ता)। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में एक छात्रा के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। विरोध के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत विद्यार्थियों की सोच और सीखने की प्रवृत्ति पर चर्चा से की। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनकी एक छात्रा से बातचीत हुई, जिसमें छात्रा ने बताया कि वास्तविक विद्यार्थी वह होता है, जिसका मन और हृदय खुला हो तथा जो दूसरों से सीखने और उनकी बात सुनने के लिए तैयार रहता हो।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि उसी बातचीत में छात्रा ने ऐसे लोगों का भी उल्लेख किया, जिन्हें यह विश्वास होता है कि वे सब कुछ जानते हैं और किसी की बात सुनने की आवश्यकता नहीं समझते। राहुल गांधी के अनुसार, छात्रा ने ऐसे लोगों के लिए “इडियट” शब्द का प्रयोग किया था। इस टिप्पणी के सामने आते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे असंसदीय बताते हुए वापस लेने की मांग की।

हंगामे के बीच राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका यह कथन सदन में उपस्थित किसी सदस्य के लिए नहीं था, बल्कि वह केवल छात्रा के साथ हुई बातचीत का उल्लेख कर रहे थे। इसके बावजूद सत्ता पक्ष की ओर से लगातार आपत्ति जारी रही।

इस दौरान अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को विषय पर केंद्रित रहने की सलाह देते हुए विधेयक पर चर्चा करने को कहा। राहुल गांधी ने जवाब दिया कि वह विधेयक पर ही चर्चा कर रहे हैं और विद्यार्थी की अवधारणा को स्पष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।

अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्रा ने तीन प्रकार के लोगों का उल्लेख किया था। उनके अनुसार पहली श्रेणी विद्यार्थी की है, दूसरी “इडियट” की और तीसरी “अंधभक्त” की। उन्होंने दावा किया कि छात्रा ने “अंधभक्त” को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया, जिसे किसी व्यक्ति पर अंधविश्वास हो और वह उसकी हर बात को अंतिम सत्य मानता हो। इस टिप्पणी पर भी सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।

विवाद बढ़ने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए सत्ता पक्ष के सदस्यों से राहुल गांधी को अपनी बात पूरी करने देने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि “इडियट” शब्द से संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए। अध्यक्ष ओम बिरला ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए संबंधित टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन को जानकारी दी कि उक्त शब्द कार्यवाही से विलोपित कर दिया गया है।

भाषण के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में मंत्रालय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रभाव रहा और कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में संघ की विचारधारा से जुड़े लोगों की कुलपति के रूप में नियुक्तियां की गईं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को “अंधभक्त” बनाने की सोच के विरुद्ध ही देशभर में विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं। लोकसभा में इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। हालांकि अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और विधेयक पर चर्चा जारी रही।

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