नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Ram Janmabhoomi Trust Petition से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में जांच और फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की मांग की गई थी। न्यायालय ने याचिका की तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए इसे ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग खारिज की।
- याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान की जांच की मांग की गई थी।
- अदालत की निगरानी में फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई।
- न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
- पीठ ने याचिका की तात्कालिकता पर सवाल उठाए।
- मामले को अदालत के पुनः खुलने के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
Ram Janmabhoomi Trust Petition में क्या मांग की गई थी?
जनहित याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में जांच कराने और फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई का भी अनुरोध किया था।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं मानते हुए नियमित प्रक्रिया के तहत मामले को बाद में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
मामले से जुड़े प्रमुख तथ्य
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मामला | श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी जनहित याचिका |
| मुख्य मांग | अदालत की निगरानी में जांच और फोरेंसिक ऑडिट |
| सुप्रीम कोर्ट का निर्णय | तत्काल सुनवाई से इनकार |
| पीठ | न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति शील नागू |
| अगला कदम | अदालत खुलने के बाद याचिका सूचीबद्ध होगी |
पीठ ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका की तात्कालिकता पर प्रश्न उठाए। अदालत ने कहा कि मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा।
फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका के गुण-दोष या उसमें लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
नियमित प्रक्रिया के तहत होगी सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का अर्थ केवल इतना है कि फिलहाल मामले की तत्काल सुनवाई नहीं होगी। याचिका पर आगे की सुनवाई नियत प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित तिथि पर की जाएगी।
मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और अदालत के अगले आदेश पर सभी पक्षों की नजर रहेगी।




