पुणे | वेब वार्ता
Pune Rape Murder Case में महाराष्ट्र की विशेष पॉक्सो अदालत ने चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी 65 वर्षीय भीमराव प्रभाकर कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी का मामला मानते हुए यह फैसला सुनाया। घटना के महज 59 दिनों के भीतर निर्णय आने को न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- पुणे की विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई।
- घटना 1 मई 2026 को नसरापुर गांव में हुई थी।
- 59 दिनों में मुकदमे का फैसला आया।
- आरोपी भीमराव कांबले सभी आरोपों में दोषी करार।
- अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, 1 मई 2026 को पुणे जिले के नसरापुर गांव में आरोपी भीमराव कांबले चार वर्षीय बच्ची को खाने की चीजें और बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे एक मवेशी शेड में ले गया, जहां बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।
जांच में सामने आया कि बच्ची की आवाज दबाने के लिए उसके मुंह में कपड़े का मोजा ठूंसा गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने बताया कि मामले में सीसीटीवी फुटेज, डीएनए प्रोफाइलिंग, चिकित्सीय रिपोर्ट, पहचान परेड, पोटेंसी टेस्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत प्रमाण प्रस्तुत किए। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए दोष सिद्ध माना।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने अदालत में दावा किया था कि बच्ची गिरने से घायल हुई थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
| प्रमुख तथ्य | विवरण |
|---|---|
| घटना की तारीख | 1 मई 2026 |
| स्थान | नसरापुर, पुणे |
| पीड़िता की आयु | 4 वर्ष |
| आरोपी | भीमराव प्रभाकर कांबले (65 वर्ष) |
| फैसला | फांसी की सजा |
| निर्णय आने में समय | 59 दिन |
39 मिनट तक हुई थी बर्बरता
लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि बच्ची के साथ लगभग 39 मिनट तक अमानवीय अत्याचार किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 18 गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया। अभियोजन पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
- सीसीटीवी फुटेज में बच्ची आरोपी के साथ जाती दिखाई दी।
- डीएनए और मेडिकल साक्ष्यों ने अपराध की पुष्टि की।
- प्रत्यक्षदर्शी बच्चों ने पहचान परेड में आरोपी की पहचान की।
- अदालत ने सभी सात आरोपों को प्रमाणित माना।
59 दिनों में पूरा हुआ मुकदमा
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित जांच पूरी करते हुए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 137 पृष्ठों का विस्तृत फैसला सुनाते हुए आरोपी को मृत्युदंड दिया।




