वाराणसी | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Airfare Surcharge को लेकर केंद्र सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने संकेत दिए हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें लंबे समय तक स्थिर रहती हैं, तो एयरलाइंस द्वारा यात्रियों से वसूले जाने वाले सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ईंधन लागत में आई राहत का लाभ सीधे हवाई यात्रियों तक पहुंचाना और विमान यात्रा को अधिक किफायती बनाना है।
- सरकार विमान किराए के सरचार्ज की समीक्षा पर विचार कर रही है।
- ईंधन कीमतें स्थिर रहने पर एयरलाइंस से औपचारिक बातचीत होगी।
- यात्रियों का वित्तीय बोझ कम करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है।
- ATF की कीमतों की हर 15 दिन में समीक्षा की जा रही है।
- 10,000 करोड़ रुपये का प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड बनाया गया है।
- एयरपोर्ट शुल्क और अन्य राहत उपायों पर भी सरकार काम कर रही है।
Airfare Surcharge पर सरकार क्यों कर रही है विचार?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के अनुसार पिछले कुछ महीनों में विमानन उद्योग को ईंधन की ऊंची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ा। अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एटीएफ की कीमतों में नरमी आई है, सरकार यह परख रही है कि यह गिरावट स्थायी है या नहीं।
यदि कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो एयरलाइंस के साथ बैठक कर यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों में कमी लाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
विमानन क्षेत्र को स्थिर रखने के लिए सरकार के कदम
सरकार ने विमानन उद्योग को वैश्विक अस्थिरता से बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें 10,000 करोड़ रुपये का प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड, एटीएफ की नियमित समीक्षा, एयरपोर्ट शुल्क में राहत तथा आवश्यक वित्तीय सहायता जैसे उपाय शामिल हैं।
| मुख्य पहल | विवरण |
|---|---|
| सरचार्ज समीक्षा | ईंधन कीमतें स्थिर रहने पर विचार |
| प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड | 10,000 करोड़ रुपये |
| ATF समीक्षा | हर 15 दिन में |
| अन्य राहत | एयरपोर्ट शुल्क में कटौती और वित्तीय सहायता |
| मुख्य उद्देश्य | हवाई यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाना |
एयरलाइंस के साथ होगी औपचारिक चर्चा
सरकार का कहना है कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पहले ईंधन कीमतों के रुझान का मूल्यांकन किया जाएगा और उसके बाद एयरलाइंस के साथ विस्तृत चर्चा कर यह तय किया जाएगा कि किराए में राहत किस प्रकार दी जा सकती है।
सस्ती हवाई यात्रा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सरकार का मानना है कि ईंधन लागत में कमी का लाभ यात्रियों तक पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से विमानन कंपनियों के साथ समन्वय कर किराया संरचना की समीक्षा की जाएगी।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाखों हवाई यात्रियों को टिकट की कीमतों में राहत मिल सकती है और घरेलू विमानन क्षेत्र की मांग को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।




