सोनीपत | राजेश आहूजा | वेब वार्ता
Sonipat Bribery Case में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता मिली है। एसीबी की टीम ने सोनीपत जिला लघु सचिवालय में तैनात सेल्स ब्रांच के एक क्लर्क को कथित रूप से 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद जिला लघु सचिवालय में हड़कंप मच गया और अधिकारियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया और आरोपी को रिश्वत की रकम लेते समय रंगे हाथों पकड़ लिया गया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)
- सोनीपत लघु सचिवालय में क्लर्क रिश्वत लेते गिरफ्तार
- क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के बदले मांगे गए थे 50 हजार रुपये
- ACB ने 30 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा
- आरोपी सेल्स ब्रांच में कस्टोडियन क्लर्क के पद पर तैनात
- मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी
Sonipat Bribery Case में कैसे हुई कार्रवाई?
मंगलवार को जिला लघु सचिवालय में उस समय हड़कंप मच गया जब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने तहसीलदार कार्यालय के निकट स्थित सेल्स ब्रांच में छापेमारी की। एसीबी अधिकारियों ने कस्टोडियन क्लर्क सचेत को कथित रूप से 30 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराने के बाद एसीबी ने पूरे मामले की प्रारंभिक जांच की और आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता विमल किशोर का आरोप है कि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर क्लर्क सचेत ने 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के आधार पर एसीबी ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 30 हजार रुपये लेते समय गिरफ्तार कर लिया।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता विमल किशोर ने आरोप लगाया कि नगर निगम और तहसील कार्यालयों में कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी मिलीभगत से लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं। उनका कहना है कि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है और बाद में काम करवाने के बदले पैसों की मांग की जाती है।
उन्होंने दावा किया कि बिना रिश्वत दिए कई मामलों में लोगों के कार्य समय पर नहीं किए जाते, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों के रिकॉर्ड की समस्या
विमल किशोर ने बताया कि पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों के पुराने रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों को लेकर बड़ी समस्याएं सामने आती हैं। विभाजन के बाद भारत में पुनर्वास पाए परिवारों को आवंटन और क्लीयरेंस से जुड़े दस्तावेज दिए गए थे, जिनकी अब जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड खोजना कठिन हो जाता है।
उनका कहना है कि कई बार पुराने रिकॉर्ड की तलाश के लिए रोहतक और पंजाब के लुधियाना तक संपर्क करना पड़ता है। इसके बावजूद दस्तावेज मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। इस प्रक्रिया में नागरिकों को वर्षों पुराने दस्तावेज जुटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
रिश्वतखोरी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अलॉटमेंट लेटर और क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेजों के नाम पर लोगों को परेशान किया जाता है। कई मामलों में आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता का हवाला देकर फाइलों को लंबित रखा जाता है, जिससे आवेदकों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित विभागों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
| मुख्य तथ्य | विवरण |
|---|---|
| कार्रवाई करने वाली एजेंसी | एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) |
| स्थान | जिला लघु सचिवालय, सोनीपत |
| आरोप | क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के बदले रिश्वत मांगना |
| बरामद राशि | 30 हजार रुपये |
| मांगी गई कथित राशि | 50 हजार रुपये |
आरोपी से पूछताछ जारी
एसीबी अधिकारियों ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। रिश्वत की राशि बरामद कर कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने का अनुरोध किया जा सकता है ताकि मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा सके।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं अथवा यह व्यक्तिगत स्तर पर किया गया कृत्य था।
अब आगे क्या होगा?एंटी करप्शन ब्यूरो आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले की गहराई से जांच करेगी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। आरोपी को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सोनीपत में हुई यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी के अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
📲 हरियाणा और क्राइम से जुड़ी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें
ये भी पढ़ें: सोनीपत: इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 35 लाख की ठगी, साइबर गिरोह का भंडाफोड़




