अब्दुल रशीद, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के न्यू सीमापुरी स्थित डिस्पेंसरी, जो स्थानीय लोगों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्था के कारण चर्चा में है। डिस्पेंसरी के मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदे पानी का स्थायी जलभराव न केवल मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा रहा है।
न्यू सीमापुरी डिस्पेंसरी, जो सीएनजी पंप के समीप स्थित है, वहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज दवा लेने और इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जैसे ही लोग डिस्पेंसरी के गेट पर पहुंचते हैं, उनका सामना गंदे और बदबूदार पानी से होता है। मरीजों को इसी पानी के बीच होकर अंदर जाना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विडंबना यह है कि जहां लोग बीमारियों से राहत पाने के लिए अस्पताल और डिस्पेंसरी का रुख करते हैं, वहीं प्रवेश द्वार पर फैला गंदा पानी स्वयं कई बीमारियों को निमंत्रण देता दिखाई दे रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्षेत्र के निवासियों और मरीजों का आरोप है कि इस समस्या की ओर संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन का ध्यान कई बार आकर्षित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। लोगों का कहना है कि जब राजधानी के स्वास्थ्य केंद्रों की यह स्थिति है, तो स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
मरीजों, बुजुर्गों और महिलाओं को गंदे पानी से होकर गुजरने में सबसे अधिक परेशानी होती है। कई बार फिसलने और दुर्घटना होने का भी खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों ने दिल्ली सरकार, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि डिस्पेंसरी के मुख्य द्वार पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा नियमित सफाई कराकर इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र ही गंदगी और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, तब आम नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।




