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15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता, 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क

नई दिल्ली, 18 जून (वेब वार्ता)। भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित दोहरा अंशदान समझौता आगामी 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। इस महत्वपूर्ण निर्णय से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पेशेवर सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर ब्रिटेन में शून्य शुल्क लागू होगा, जिससे भारतीय उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।

फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच हुई बैठक में इस समझौते को लागू करने पर सहमति बनी। बैठक के बाद नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक माध्यम मंच पर इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

व्यापार और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगा। इसके माध्यम से किसानों, कामगारों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, नवाचार आधारित उद्यमों तथा युवा उद्यमियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि अगली पीढ़ी का यह व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। उनके अनुसार वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान तथा प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा।

99 प्रतिशत निर्यात पर नहीं लगेगा शुल्क

व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

विशेष रूप से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर 70 प्रतिशत तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत तक, इंजीनियरिंग वस्तुओं एवं वाहन कलपुर्जों पर 18 प्रतिशत तक तथा जूते-चप्पल और चमड़ा उत्पादों पर 16 प्रतिशत तक का शुल्क समाप्त हो जाएगा। इसके अतिरिक्त वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र पर 12 प्रतिशत तक तथा रसायन एवं औषधि उत्पादों पर आठ प्रतिशत तक के शुल्क को हटाया जाएगा।

भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत

दोहरा अंशदान समझौते के लागू होने से ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा अंशदान दो बार जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे 75 हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक नियोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।

समझौते के तहत सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। इससे ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों की गतिशीलता बढ़ेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

सेवा क्षेत्र के लिए खुलेंगे नए अवसर

यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा क्षेत्र को भी व्यापक लाभ पहुंचाएगा। इसके माध्यम से 137 उप-क्षेत्रों में सेवा निर्यात का विस्तार होगा। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और व्यावसायिक परामर्श जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को ब्रिटेन के बाजार में अधिक अवसर प्राप्त होंगे और दोनों देशों के बीच ज्ञान, कौशल तथा तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

लंबी वार्ता के बाद मिला अंतिम स्वरूप

भारत और ब्रिटेन के बीच इस व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले 14 दौर की विस्तृत वार्ताएं हुई थीं। दोनों देशों ने 06 मई 2025 को समझौते को अंतिम रूप दिया था। इसके बाद 24 जुलाई 2025 को लंदन में नरेन्द्र मोदी और कीर स्टार्मर की उपस्थिति में पीयूष गोयल तथा ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यवसाय सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।

बाद में 10 फरवरी 2026 को सामाजिक सुरक्षा से संबंधित दोहरा अंशदान समझौता भी संपन्न हुआ। अब 15 जुलाई से दोनों समझौतों के प्रभावी होने के साथ भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।

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