कारोबार28 दिन की वैधता वाले रिचार्ज का गणित,...

28 दिन की वैधता वाले रिचार्ज का गणित, ग्राहकों से कैसे होती है अतिरिक्त कमाई

नई दिल्ली, 17 जून (वेब वार्ता)। मोबाइल उपभोक्ताओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब एक माह में सामान्यतः 30 दिन होते हैं तो अधिकांश दूरसंचार कंपनियों के प्रीपेड रिचार्ज की वैधता केवल 28 दिन ही क्यों होती है। पहली नजर में यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह प्रतीत होती है, लेकिन इसके पीछे कंपनियों का एक सुविचारित व्यावसायिक और गणितीय मॉडल काम करता है।

देश की प्रमुख दूरसंचार कंपनियां लंबे समय से 28 दिन की वैधता वाले रिचार्ज योजनाएं उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि कंपनियां अपने प्रत्येक रिचार्ज पर वैधता अवधि स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं, फिर भी इस व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल कंपनियों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

28 दिन का चक्र कैसे करता है अतिरिक्त कमाई?

यदि किसी रिचार्ज योजना की वैधता 30 दिन हो, तो उपभोक्ता को एक वर्ष में लगभग 12 बार रिचार्ज कराना पड़ेगा। लेकिन 28 दिन की वैधता होने पर प्रत्येक चक्र में दो से तीन दिन कम हो जाते हैं। यही अंतर पूरे वर्ष में जुड़कर लगभग 28 दिन का अतिरिक्त समय बन जाता है।

इसका परिणाम यह होता है कि उपभोक्ता को वर्ष भर में 12 बार के बजाय लगभग 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। इस प्रकार कंपनियों को प्रत्येक ग्राहक से एक अतिरिक्त रिचार्ज की आय प्राप्त हो जाती है। बड़ी संख्या में ग्राहकों के कारण यह अतिरिक्त आय दूरसंचार कंपनियों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होती है।

कंपनियां क्या देती हैं तर्क?

दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि कैलेंडर के सभी माह समान अवधि के नहीं होते। कुछ माह 31 दिन के होते हैं, कुछ 30 दिन के, जबकि फरवरी 28 या 29 दिन की होती है। ऐसे में प्रीपेड सेवाओं को एक समान और स्वचालित तरीके से संचालित करने के लिए 28 दिन का मानक चक्र अपनाया गया है।

कंपनियों के अनुसार एक निश्चित अवधि का चक्र बिलिंग और तकनीकी संचालन को सरल बनाता है तथा सभी योजनाओं में समानता बनाए रखता है।

उपभोक्ताओं की शिकायतों पर हुआ हस्तक्षेप

28 दिन की वैधता को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों और उपभोक्ताओं की नाराजगी को देखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने इस विषय में हस्तक्षेप किया। प्राधिकरण ने सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया कि वे अपने पोर्टफोलियो में कम से कम एक ऐसी योजना अवश्य रखें जिसकी वैधता पूरे 30 दिनों की हो।

इसके अतिरिक्त कंपनियों को एक कैलेंडर माह आधारित योजना भी उपलब्ध करानी होती है। इस व्यवस्था के अंतर्गत यदि कोई उपभोक्ता किसी विशेष तारीख को रिचार्ज कराता है, तो अगला नवीनीकरण उसी तारीख को होगा, चाहे माह में 28 दिन हों, 30 दिन हों या 31 दिन।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है विकल्प?

नियामक प्राधिकरण के निर्देशों के बाद अब उपभोक्ताओं के पास 30 दिन और कैलेंडर माह आधारित योजनाओं का विकल्प उपलब्ध है। हालांकि अधिकांश उपभोक्ता अब भी 28 दिन वाली योजनाएं चुनते हैं, क्योंकि ये पहली नजर में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिचार्ज योजना चुनते समय केवल कीमत पर नहीं, बल्कि वैधता अवधि और वार्षिक खर्च पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे उपभोक्ता अपने लिए अधिक लाभकारी योजना का चयन कर सकते हैं।

जागरूकता है सबसे बड़ा समाधान

दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां विभिन्न प्रकार की योजनाएं पेश कर रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह आवश्यक है कि वे रिचार्ज कराने से पहले योजना की शर्तों और वैधता अवधि को ध्यान से समझें। 28 दिन और 30 दिन की वैधता के बीच का अंतर भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन लंबे समय में इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -