नई दिल्ली, 17 जून (वेब वार्ता)। संदेश सेवा मंच टेलीग्राम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस समूह और व्हाट्सऐप पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि भारत में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने के हालिया प्रयासों के पीछे इन कंपनियों की भूमिका हो सकती है। ड्यूरोव ने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस ने भारत के बाहर भी लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की सेवाओं में बाधा उत्पन्न की है।
पावेल ड्यूरोव ने सामाजिक माध्यम मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय दूरसंचार कंपनी रिलायंस कथित रूप से ‘बीजीपी हाईजैकिंग’ नामक तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से भारत के बाहर, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात सहित कई क्षेत्रों में टेलीग्राम की पहुंच को प्रभावित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में की गई शिकायतों को भी नजरअंदाज किया गया।
ड्यूरोव ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई प्रतिस्पर्धात्मक कारणों से की जा रही हो सकती है, क्योंकि मेटा की रिलायंस समूह की डिजिटल गतिविधियों में हिस्सेदारी है और व्हाट्सऐप मेटा की ही स्वामित्व वाली सेवा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक इंटरनेट मार्गों के साथ इस प्रकार का हस्तक्षेप चिंताजनक है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
हालांकि, दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ उद्योग सूत्र ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। सूत्र के अनुसार पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की विभिन्न इकाइयों के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्र के भीतर केबल नेटवर्क का संचालन करने वाली कंपनी और जियो सेवाओं का संचालन करने वाली इकाई अलग-अलग हैं तथा दोनों की प्रबंधन संरचना भी भिन्न है।
सूत्र ने यह भी कहा कि मेटा जियो में केवल अल्पांश निवेशक है और उसके दैनिक संचालन या व्यावसायिक निर्णयों में उसकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। ऐसे में रिलायंस, जियो, मेटा और व्हाट्सऐप को एक साथ जोड़कर आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।
इस बीच टेलीग्राम को लेकर भारत में भी स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकार ने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक मामलों की जांच और रोकथाम के मद्देनजर प्रौद्योगिकी कंपनियों को टेलीग्राम से संबंधित कुछ निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त साक्ष्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष सुविधाओं पर भी निगरानी रखी जा रही है।
टेलीग्राम, रिलायंस कम्युनिकेशंस, जियो, मेटा और व्हाट्सऐप की ओर से इस पूरे विवाद पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि ड्यूरोव के आरोपों ने वैश्विक स्तर पर इंटरनेट संरचना, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल मंचों की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और तकनीकी जांच आवश्यक है ताकि तथ्यों की स्पष्टता सामने आ सके और उपयोगकर्ताओं का भरोसा बना रहे।




